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Bhopal News: अतिथि विद्वानों को राहत के संकेत, सीएम बोले-वेतन-नियमितीकरण समेत लंबित मांगों को लेकर बनेगी समिति
Fri, 10 Jul 2026 06:17 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 10 Jul 2026 06:17 PM IST
सार
भोपाल में भारतीय मजदूर संघ के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों की लंबित मांगों पर समिति गठित करने की घोषणा की। समिति फिक्स सैलरी, नियमितीकरण और अन्य मांगों पर विचार करेगी। सरकार दूसरे राज्यों के बेहतर मॉडल का अध्ययन कर मध्यप्रदेश में लागू करने की तैयारी करेगी।
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भारतीय मजदूर संघ के कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश के अतिथि विद्वानों की वर्षों पुरानी मांगों के समाधान की दिशा में सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि फिक्स सैलरी, नियमितीकरण, सामाजिक सुरक्षा और अन्य लंबित मांगों पर विचार के लिए एक समिति बनाई जाएगी। यह समिति विभिन्न राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर मध्यप्रदेश के लिए उपयुक्त मॉडल तैयार करेगी। भोपाल में भारतीय मजदूर संघ के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को निर्देश दिए कि वे उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समिति बनाकर अतिथि विद्वानों की मांगों पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समस्याओं को टालना नहीं, बल्कि उनका समाधान करना है। उन्होंने कहा, अटकाने-लटकाने का समय अब खत्म हो गया है। सरकार सकारात्मक सोच के साथ निर्णय ले रही है।
मांगों पर भी गंभीरता से विचार होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पहले भी अतिथि विद्वानों के हित में कई फैसले ले चुकी है। अब शेष मांगों पर भी गंभीरता से विचार होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा सहित जिन राज्यों में अतिथि विद्वानों के लिए बेहतर व्यवस्था लागू है, उसका अध्ययन कर मध्यप्रदेश में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार पहले ही दे चुकी है कई सुविधाएं
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सरकार ने अतिथि विद्वानों को कई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इनमें 13 आकस्मिक अवकाश, तीन ऐच्छिक अवकाश, महिला अतिथि विद्वानों को प्रसूति अवकाश, सहायक प्राध्यापक भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण तथा वर्ष में एक बार स्थानांतरण की सुविधा शामिल है। उन्होंने बताया कि तकनीकी शिक्षा विभाग में अतिथि विद्वानों को अभी 12 महीने के बजाय 11 महीने का वेतन मिलने की व्यवस्था है। सरकार इस विसंगति को भी दूर करेगी, ताकि उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिथि विद्वानों को समान लाभ मिल सके।
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सामाजिक सुरक्षा पर भी उठी आवाज
भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने अतिथि विद्वानों की सामाजिक सुरक्षा और अन्य लंबित मांगों का जल्द समाधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिलने से शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। साथ ही औद्योगिक विकास के जरिए प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।
यह भी पढ़ें-जुलाई की झमाझम से बदली तस्वीर, एमपी में सामान्य से 10% ज्यादा बारिश, अगले 4 दिन तक बारिश के आसार
नई शिक्षा नीति और भारतीय शिक्षा परंपरा पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए भगवान राम और भगवान कृष्ण के शिक्षा काल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था सदियों से दुनिया के लिए प्रेरणा रही है और नई शिक्षा नीति के माध्यम से मध्यप्रदेश भी शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (जीईआर) राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। अब सरकार केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नवाचार, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
यह भी पढ़ें-भोपाल कलेक्ट्रेट में हाईवोल्टेज हंगामा: भिड़े विधायक-अध्यक्ष, औकात में रहो से मचा बवाल, विधायकों का वॉकआउट
नशा मुक्ति अभियान में शिक्षकों से सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री ने अतिथि विद्वानों और शिक्षकों से प्रदेश में चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया, उसी तरह अब नशे के खिलाफ भी व्यापक जनजागरण की जरूरत है। शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को जागरूक कर इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
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मांगों पर भी गंभीरता से विचार होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पहले भी अतिथि विद्वानों के हित में कई फैसले ले चुकी है। अब शेष मांगों पर भी गंभीरता से विचार होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा सहित जिन राज्यों में अतिथि विद्वानों के लिए बेहतर व्यवस्था लागू है, उसका अध्ययन कर मध्यप्रदेश में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
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सरकार पहले ही दे चुकी है कई सुविधाएं
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सरकार ने अतिथि विद्वानों को कई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इनमें 13 आकस्मिक अवकाश, तीन ऐच्छिक अवकाश, महिला अतिथि विद्वानों को प्रसूति अवकाश, सहायक प्राध्यापक भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण तथा वर्ष में एक बार स्थानांतरण की सुविधा शामिल है। उन्होंने बताया कि तकनीकी शिक्षा विभाग में अतिथि विद्वानों को अभी 12 महीने के बजाय 11 महीने का वेतन मिलने की व्यवस्था है। सरकार इस विसंगति को भी दूर करेगी, ताकि उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिथि विद्वानों को समान लाभ मिल सके।
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सामाजिक सुरक्षा पर भी उठी आवाज
भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने अतिथि विद्वानों की सामाजिक सुरक्षा और अन्य लंबित मांगों का जल्द समाधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिलने से शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। साथ ही औद्योगिक विकास के जरिए प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।
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नई शिक्षा नीति और भारतीय शिक्षा परंपरा पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए भगवान राम और भगवान कृष्ण के शिक्षा काल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था सदियों से दुनिया के लिए प्रेरणा रही है और नई शिक्षा नीति के माध्यम से मध्यप्रदेश भी शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (जीईआर) राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। अब सरकार केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नवाचार, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
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नशा मुक्ति अभियान में शिक्षकों से सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री ने अतिथि विद्वानों और शिक्षकों से प्रदेश में चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया, उसी तरह अब नशे के खिलाफ भी व्यापक जनजागरण की जरूरत है। शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को जागरूक कर इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
