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यूसीसी के खिलाफ 16 से 20 अगस्त तक चलेगा अभियान: आरिफ मसूद बोले- आज मुसलमान कल दूसरे समुदाय भी होंगे प्रभावित
Mon, 10 Aug 2026 05:24 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 10 Aug 2026 05:24 PM IST
सार
समान नागरिक संहिता के खिलाफ 16 से 20 अगस्त तक प्रदेशभर में अभियान चलेगा। आरिफ मसूद के मुताबिक जिलों में राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिए जाएंगे। इसके बाद जन-संवाद के जरिए अन्य समुदायों को भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कानूनी लड़ाई की तैयारी की बात कही, जबकि मुफ्ती जुनैद ने वंचित वर्गों की आवाज के लिए नया मंच बनाने की घोषणा की।
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प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
समान नागरिक संहिता को लेकर मध्य प्रदेश में विरोध अभियान की तैयारी शुरू हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने बताया कि 16 से 20 अगस्त तक प्रदेश के सभी जिलों में अभियान चलाकर राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। अभियान की कमान महिलाओं और युवाओं को देने की बात कही गई है। भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, इंदौर से आए मुफ्ती जुनैद और भोपाल के मौलाना माज ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में कानून को लेकर सरकार पर निशाना साधा। मसूद ने दावा किया कि हाल में लाया गया कानून केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित असर नहीं रखता, बल्कि भविष्य में दूसरे समुदायों के अधिकारों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
संविधान के अधिकारों पर असर का खतरा
आरिफ मसूद ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। उनके अनुसार नए कानून से इन संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि आज यदि इसका प्रभाव मुसलमानों पर दिखाई दे रहा है तो आगे चलकर दूसरे समुदाय भी इसके दायरे में आ सकते हैं। मसूद ने बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा में संशोधन प्रस्ताव रखते हुए इस विषय को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की थी, ताकि कानून के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हो सके। उनका आरोप है कि सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाना जरूरी है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में बारिश का कहर: सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी, बैरसिया मार्ग बंद, कई जगह जलभराव से हाहाकार
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16 से 20 अगस्त तक जिलों में ज्ञापन
अभियान के पहले चरण में 16 से 20 अगस्त तक प्रदेश के सभी जिलों में राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। प्रत्येक जिले में सीमित संख्या में लोगों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मुलाकात करेगा। इसमें महिलाओं, युवतियों और युवाओं की संख्या अधिक रखने की योजना है। इसके बाद अभियान के दूसरे चरण में विभिन्न जिलों में जन-संवाद केंद्र बनाए जाने की बात कही गई है। इन केंद्रों पर दूसरे समुदायों और सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को बुलाकर कानून से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
कानूनी लड़ाई की भी तैयारी
मसूद ने कहा कि कानून के खिलाफ न्यायालय में जाने के लिए वकीलों की टीम तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी लड़ाई किसी एक संगठन के बैनर तले नहीं होगी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद सहित विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों को साथ लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें-भोपाल में आज सभी स्कूल बंद: तेज बारिश के चलते नर्सरी से 12वीं तक छुट्टी, कलेक्टर के निर्देश पर आदेश जारी
वंचित वर्गों की आवाज के लिए बनेगा नया मंच
मुफ्ती जुनैद ने कहा कि कानूनों पर चर्चा के साथ बेरोजगारी, ओबीसी आरक्षण, आदिवासी मुद्दों और महिलाओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर भी सरकार का ध्यान जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तर पर जल्द राइट ऑफ द अनहर्ड नाम से एक मंच बनाया जाएगा।उनके मुताबिक यह मंच संवैधानिक दायरे में रहकर उन लोगों और वर्गों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का काम करेगा, जिनकी आवाज पर्याप्त रूप से सामने नहीं आ पा रही है।
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संविधान के अधिकारों पर असर का खतरा
आरिफ मसूद ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। उनके अनुसार नए कानून से इन संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि आज यदि इसका प्रभाव मुसलमानों पर दिखाई दे रहा है तो आगे चलकर दूसरे समुदाय भी इसके दायरे में आ सकते हैं। मसूद ने बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा में संशोधन प्रस्ताव रखते हुए इस विषय को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की थी, ताकि कानून के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हो सके। उनका आरोप है कि सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाना जरूरी है।
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16 से 20 अगस्त तक जिलों में ज्ञापन
अभियान के पहले चरण में 16 से 20 अगस्त तक प्रदेश के सभी जिलों में राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। प्रत्येक जिले में सीमित संख्या में लोगों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मुलाकात करेगा। इसमें महिलाओं, युवतियों और युवाओं की संख्या अधिक रखने की योजना है। इसके बाद अभियान के दूसरे चरण में विभिन्न जिलों में जन-संवाद केंद्र बनाए जाने की बात कही गई है। इन केंद्रों पर दूसरे समुदायों और सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को बुलाकर कानून से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
कानूनी लड़ाई की भी तैयारी
मसूद ने कहा कि कानून के खिलाफ न्यायालय में जाने के लिए वकीलों की टीम तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी लड़ाई किसी एक संगठन के बैनर तले नहीं होगी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद सहित विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों को साथ लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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वंचित वर्गों की आवाज के लिए बनेगा नया मंच
मुफ्ती जुनैद ने कहा कि कानूनों पर चर्चा के साथ बेरोजगारी, ओबीसी आरक्षण, आदिवासी मुद्दों और महिलाओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर भी सरकार का ध्यान जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तर पर जल्द राइट ऑफ द अनहर्ड नाम से एक मंच बनाया जाएगा।उनके मुताबिक यह मंच संवैधानिक दायरे में रहकर उन लोगों और वर्गों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का काम करेगा, जिनकी आवाज पर्याप्त रूप से सामने नहीं आ पा रही है।
