{"_id":"6a79bb1176a9c9bccb07850f","slug":"government-gears-up-for-sealing-drive-in-bhopal-master-plan-coming-soon-traders-and-residents-at-odds-deman-2026-08-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोपाल में सीलिंग पर सरकार की तैयारी: मास्टर प्लान जल्द, व्यापारी-रहवासी आमने-सामने, कार्रवाई की मांग तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोपाल में सीलिंग पर सरकार की तैयारी: मास्टर प्लान जल्द, व्यापारी-रहवासी आमने-सामने, कार्रवाई की मांग तेज
Mon, 10 Aug 2026 05:45 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 10 Aug 2026 05:45 PM IST
सार
भोपाल के सीलिंग विवाद में सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन के साथ व्यापारियों और रहवासियों को राहत देने का रास्ता तलाश रही है। मास्टर प्लान की तैयारी जारी है। व्यापारी चौड़ी सड़कों को व्यावसायिक दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ता आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई के पक्ष में हैं।
विज्ञापन
सीलिंग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी के आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बीच अब मामला सिर्फ सीलिंग तक सीमित नहीं रह गया है। व्यापारियों की मांग है कि वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियां चल रहे चौड़े मार्गों को व्यावसायिक या अर्ध-व्यावसायिक क्षेत्र का दर्जा दिया जाए, जबकि रहवासी और याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि आवासीय भूखंडों पर नियमों के विपरीत बने व्यावसायिक निर्माण पर कार्रवाई जरूरी है। इस बीच सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कराने के साथ दोनों पक्षों को राहत देने का रास्ता तलाशने की बात कही है।
आदेशों का पालन भी होगा, नागरिकों को राहत भी देंगे
नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि सरकार और नगर निगम इस बात के लिए संकल्पित हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन हो और नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में गंभीर है और बेहतर से बेहतर कानूनी कदम उठाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रहवासी चाहते हैं कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां न हों, वहीं व्यापारियों का कारोबार कई वर्षों पुराना है। ऐसे में दोनों पक्षों को ध्यान में रखकर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
मास्टर प्लान को लेकर सरकार की तैयारी
सीलिंग विवाद के बीच मास्टर प्लान को लेकर भी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से नया मास्टर प्लान नहीं आने के कारण शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप नए व्यावसायिक क्षेत्र विकसित नहीं हो सके। इस पर किशन सूर्यवंशी ने कहा कि सरकार लगातार मास्टर प्लान तैयार करने में जुटी है। भोपाल में महानगरीय क्षेत्र की दृष्टि से जो नए क्षेत्र जोड़े जा रहे हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए व्यापक विकास योजना बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और जल्द ही यह योजना शहर के सामने आने की बात कही गई है।
विज्ञापन
मास्टर प्लान नहीं है तो नियम तोड़ने की छूट भी नहीं
मामले के याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध किया है। उनका कहना है कि अरेरा कॉलोनी सहित कई आवासीय क्षेत्रों में आवासीय भूखंडों का इस्तेमाल व्यावसायिक निर्माण के लिए किया गया, जिससे रहवासियों को पार्किंग, यातायात, जल निकासी और सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। त्रिपाठी का आरोप है कि कई मामलों में आवासीय भवन के निर्माण की अनुमति लेकर बाद में वहां व्यावसायिक निर्माण कर दिया गया। उनका कहना है कि नगर निगम को यह देखना चाहिए कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण हुआ है तो उस पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने मास्टर प्लान का हवाला देकर व्यावसायिक गतिविधियों को सही ठहराने पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान लंबित होने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति नियमों के विपरीत निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि शुरू कर सकता है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में बारिश का कहर: सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी, बैरसिया मार्ग बंद, कई जगह जलभराव से हाहाकार
60 फीट सड़क अर्ध-व्यावसायिक, 80 फीट सड़क व्यावसायिक हो
10 नंबर मार्केट व्यापारी संघ के अध्यक्ष रामचंद्र पाटीदार ने कहा कि कॉलोनी के अंदर आवासीय क्षेत्रों में बनी दुकानों पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन 60 और 80 फीट चौड़ी सड़कों की स्थिति अलग है। इन मार्गों पर पहले से बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उन्होंने मांग की कि 60 फीट चौड़ी सड़कों को अर्ध-व्यावसायिक और 80 फीट चौड़ी सड़कों को व्यावसायिक घोषित करने पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि इससे वर्षों से चल रहे कारोबार को व्यवस्थित किया जा सकेगा और आवासीय गलियों में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकेगा। पाटीदार ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए पहले समिति बनाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद वह आगे नहीं बढ़ सकी। अब सरकार को पूरे मामले की वास्तविक स्थिति न्यायालय के सामने रखनी चाहिए।भोपाल के सीलिंग विवाद में सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन के साथ व्यापारियों और रहवासियों को राहत देने का रास्ता तलाश रही है। मास्टर प्लान की तैयारी जारी है। व्यापारी चौड़ी सड़कों को व्यावसायिक दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई के पक्ष में हैं।
बाजार नहीं बढ़े, इसलिए आवासीय क्षेत्रों पर बढ़ा दबाव
व्यवसायी अमृत गहलोत का कहना है कि लंबे समय से नए व्यवस्थित व्यावसायिक बाजार विकसित नहीं होने के कारण पुराने बाजारों पर दबाव बढ़ता गया। इससे कई आवासीय क्षेत्रों में भी व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ीं। उनका सुझाव है कि चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक या अर्ध-व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने और छोटी सड़कों पर इन्हें प्रतिबंधित करने का विकल्प देखा जा सकता है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में आज सभी स्कूल बंद: तेज बारिश के चलते नर्सरी से 12वीं तक छुट्टी, कलेक्टर के निर्देश पर आदेश जारी
सरकार के सामने अब तीन मोर्चों पर चुनौती
मौजूदा स्थिति में सरकार के सामने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन, रहवासियों की परेशानी दूर करना और वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारियों के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशना तीनों बड़ी चुनौतियां हैं। इसी बीच नगर निगम ने कार्रवाई का दायरा भी बढ़ाया है। अब सिर्फ दुकानें सील करने के बजाय भवनों को स्वीकृत नक्शे के अनुरूप करने के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं। यानी जहां बेसमेंट पार्किंग में दुकानें बना दी गई हैं या स्वीकृत नक्शे में बदलाव कर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, वहां मूल स्वरूप बहाल करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
विज्ञापन
आदेशों का पालन भी होगा, नागरिकों को राहत भी देंगे
नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि सरकार और नगर निगम इस बात के लिए संकल्पित हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन हो और नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में गंभीर है और बेहतर से बेहतर कानूनी कदम उठाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रहवासी चाहते हैं कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां न हों, वहीं व्यापारियों का कारोबार कई वर्षों पुराना है। ऐसे में दोनों पक्षों को ध्यान में रखकर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
विज्ञापन
मास्टर प्लान को लेकर सरकार की तैयारी
सीलिंग विवाद के बीच मास्टर प्लान को लेकर भी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से नया मास्टर प्लान नहीं आने के कारण शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप नए व्यावसायिक क्षेत्र विकसित नहीं हो सके। इस पर किशन सूर्यवंशी ने कहा कि सरकार लगातार मास्टर प्लान तैयार करने में जुटी है। भोपाल में महानगरीय क्षेत्र की दृष्टि से जो नए क्षेत्र जोड़े जा रहे हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए व्यापक विकास योजना बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और जल्द ही यह योजना शहर के सामने आने की बात कही गई है।
विज्ञापन
मास्टर प्लान नहीं है तो नियम तोड़ने की छूट भी नहीं
मामले के याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध किया है। उनका कहना है कि अरेरा कॉलोनी सहित कई आवासीय क्षेत्रों में आवासीय भूखंडों का इस्तेमाल व्यावसायिक निर्माण के लिए किया गया, जिससे रहवासियों को पार्किंग, यातायात, जल निकासी और सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। त्रिपाठी का आरोप है कि कई मामलों में आवासीय भवन के निर्माण की अनुमति लेकर बाद में वहां व्यावसायिक निर्माण कर दिया गया। उनका कहना है कि नगर निगम को यह देखना चाहिए कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण हुआ है तो उस पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने मास्टर प्लान का हवाला देकर व्यावसायिक गतिविधियों को सही ठहराने पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान लंबित होने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति नियमों के विपरीत निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि शुरू कर सकता है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में बारिश का कहर: सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी, बैरसिया मार्ग बंद, कई जगह जलभराव से हाहाकार
60 फीट सड़क अर्ध-व्यावसायिक, 80 फीट सड़क व्यावसायिक हो
10 नंबर मार्केट व्यापारी संघ के अध्यक्ष रामचंद्र पाटीदार ने कहा कि कॉलोनी के अंदर आवासीय क्षेत्रों में बनी दुकानों पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन 60 और 80 फीट चौड़ी सड़कों की स्थिति अलग है। इन मार्गों पर पहले से बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उन्होंने मांग की कि 60 फीट चौड़ी सड़कों को अर्ध-व्यावसायिक और 80 फीट चौड़ी सड़कों को व्यावसायिक घोषित करने पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि इससे वर्षों से चल रहे कारोबार को व्यवस्थित किया जा सकेगा और आवासीय गलियों में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकेगा। पाटीदार ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए पहले समिति बनाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद वह आगे नहीं बढ़ सकी। अब सरकार को पूरे मामले की वास्तविक स्थिति न्यायालय के सामने रखनी चाहिए।भोपाल के सीलिंग विवाद में सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन के साथ व्यापारियों और रहवासियों को राहत देने का रास्ता तलाश रही है। मास्टर प्लान की तैयारी जारी है। व्यापारी चौड़ी सड़कों को व्यावसायिक दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई के पक्ष में हैं।
बाजार नहीं बढ़े, इसलिए आवासीय क्षेत्रों पर बढ़ा दबाव
व्यवसायी अमृत गहलोत का कहना है कि लंबे समय से नए व्यवस्थित व्यावसायिक बाजार विकसित नहीं होने के कारण पुराने बाजारों पर दबाव बढ़ता गया। इससे कई आवासीय क्षेत्रों में भी व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ीं। उनका सुझाव है कि चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक या अर्ध-व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने और छोटी सड़कों पर इन्हें प्रतिबंधित करने का विकल्प देखा जा सकता है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में आज सभी स्कूल बंद: तेज बारिश के चलते नर्सरी से 12वीं तक छुट्टी, कलेक्टर के निर्देश पर आदेश जारी
सरकार के सामने अब तीन मोर्चों पर चुनौती
मौजूदा स्थिति में सरकार के सामने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन, रहवासियों की परेशानी दूर करना और वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारियों के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशना तीनों बड़ी चुनौतियां हैं। इसी बीच नगर निगम ने कार्रवाई का दायरा भी बढ़ाया है। अब सिर्फ दुकानें सील करने के बजाय भवनों को स्वीकृत नक्शे के अनुरूप करने के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं। यानी जहां बेसमेंट पार्किंग में दुकानें बना दी गई हैं या स्वीकृत नक्शे में बदलाव कर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, वहां मूल स्वरूप बहाल करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
