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कांग्रेस में अनुशासन पर सख्ती: पार्टी विरोधी बयान देने वाले नेताओं पर एक्शन शुरू, जिलाध्यक्ष तैयार करेंगे सूची
Sat, 04 Jul 2026 12:51 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 04 Jul 2026 12:51 PM IST
सार
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने पार्टी विरोधी बयानबाजी और अनुशासनहीनता पर सख्ती शुरू कर दी है। प्रदेश नेतृत्व ने सभी जिलाध्यक्षों को ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जो पार्टी लाइन से हटकर बयान दे रहे हैं या सोशल मीडिया पर नेतृत्व व नीतियों के खिलाफ टिप्पणी कर रहे हैं।
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पीसीसी भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में बढ़ती अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए पार्टी विरोधी बयान देने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि अब पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग बयानबाजी, नेतृत्व पर सार्वजनिक टिप्पणी या सोशल मीडिया के जरिए संगठन की छवि खराब करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके लिए सभी जिलाध्यक्षों को ऐसे नेताओं की पहचान कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश कांग्रेस का मानना है कि पिछले कुछ समय से कई नेता सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर पार्टी के फैसलों और नेतृत्व के खिलाफ बयान देकर संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए अब अनुशासन लागू करने की कवायद तेज कर दी गई है।
जिलाध्यक्ष तैयार करेंगे सूची
सूची तैयार कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी
प्रदेश कांग्रेस संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले की ओर से जारी निर्देशों में सभी जिलाध्यक्षों से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों की पहचान करें, जो बार-बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे रहे हैं या संगठन की नीतियों के विपरीत सार्वजनिक टिप्पणी कर रहे हैं। इनकी सूची तैयार कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर भी रहेगी नजर
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि निगरानी सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस, सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी। फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी, उसके नेतृत्व और निर्णयों के खिलाफ की जाने वाली पोस्ट और टिप्पणियों पर भी नजर रखी जाएगी। संगठन को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ पदाधिकारी सोशल मीडिया पर ही पार्टी के खिलाफ माहौल बना रहे हैं।
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पहले नोटिस, फिर होगी कार्रवाई
निर्देशों के मुताबिक, जिन नेताओं या कार्यकर्ताओं की पहचान होगी, उन्हें सबसे पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला या नोटिस के बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं आया, तो पार्टी संविधान के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें पद से हटाने, निलंबन या निष्कासन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें-मध्यप्रदेश में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 19 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, नदी-नाले उफान पर
जिला स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश करेगा फैसला
प्रदेश कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं होगी, उनकी पूरी रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा जाएगा। इसके बाद प्रदेश स्तर पर मामले की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
वरिष्ठ नेताओं की बैठकों में कई बार उठा मुद्दा
संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले के अनुसार, पार्टी फोरम पर वरिष्ठ नेताओं ने कई बार यह मुद्दा उठाया कि कुछ नेता संगठन की बैठकों में अपनी बात रखने के बजाय मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हैं। इससे पार्टी की छवि प्रभावित होती है और कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनती है। इसी के बाद प्रदेश नेतृत्व ने अनुशासन को लेकर सख्त नीति लागू करने का निर्णय लिया।
यह भी पढ़ें-भोपाल में फायर सेफ्टी पर निगम का बड़ा एक्शन: एलन समेत 6 कोचिंग संस्थान सील, भवन खाली कराकर लगाए ताले
आगामी चुनावों से पहले संगठन को एकजुट करने की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस कर रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि नेताओं के आपसी मतभेद या सार्वजनिक बयान संगठन की रणनीति पर असर डालें। इसी वजह से अब अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
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जिलाध्यक्ष तैयार करेंगे सूची
सूची तैयार कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी
प्रदेश कांग्रेस संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले की ओर से जारी निर्देशों में सभी जिलाध्यक्षों से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों की पहचान करें, जो बार-बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे रहे हैं या संगठन की नीतियों के विपरीत सार्वजनिक टिप्पणी कर रहे हैं। इनकी सूची तैयार कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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सोशल मीडिया पर भी रहेगी नजर
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि निगरानी सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस, सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी। फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी, उसके नेतृत्व और निर्णयों के खिलाफ की जाने वाली पोस्ट और टिप्पणियों पर भी नजर रखी जाएगी। संगठन को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ पदाधिकारी सोशल मीडिया पर ही पार्टी के खिलाफ माहौल बना रहे हैं।
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पहले नोटिस, फिर होगी कार्रवाई
निर्देशों के मुताबिक, जिन नेताओं या कार्यकर्ताओं की पहचान होगी, उन्हें सबसे पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला या नोटिस के बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं आया, तो पार्टी संविधान के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें पद से हटाने, निलंबन या निष्कासन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।
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जिला स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश करेगा फैसला
प्रदेश कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं होगी, उनकी पूरी रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा जाएगा। इसके बाद प्रदेश स्तर पर मामले की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
वरिष्ठ नेताओं की बैठकों में कई बार उठा मुद्दा
संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले के अनुसार, पार्टी फोरम पर वरिष्ठ नेताओं ने कई बार यह मुद्दा उठाया कि कुछ नेता संगठन की बैठकों में अपनी बात रखने के बजाय मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हैं। इससे पार्टी की छवि प्रभावित होती है और कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनती है। इसी के बाद प्रदेश नेतृत्व ने अनुशासन को लेकर सख्त नीति लागू करने का निर्णय लिया।
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आगामी चुनावों से पहले संगठन को एकजुट करने की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस कर रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि नेताओं के आपसी मतभेद या सार्वजनिक बयान संगठन की रणनीति पर असर डालें। इसी वजह से अब अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
