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वीआईटी भोपाल मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त: यूजीसी और राज्य सरकार को फिर नोटिस, 29 जून तक मांगी जांच रिपोर्ट
Sat, 06 Jun 2026 11:42 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:42 AM IST
सार
वीआईटी भोपाल के नाम और कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूजीसी और मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग को दोबारा नोटिस जारी किया है। आयोग ने 29 जून तक जांच रिपोर्ट मांगी है और समय पर जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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वीआईटी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) भोपाल से जुड़े मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है। आयोग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग को पुनः नोटिस जारी कर शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। एनएचआरसी ने कहा है कि संबंधित विभाग 29 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा-13 के तहत उपलब्ध शक्तियों का उपयोग किया जा सकता है।
पहले भी मांगा था जवाब, नहीं मिली रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार आयोग ने पहले भी यूजीसी और राज्य शासन से मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन तय समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद आयोग ने दोबारा नोटिस जारी कर मामले में प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
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एनएसयूआई नेता की शिकायत पर हुई कार्रवाई
यह मामला एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय अपने नाम में भोपाल शब्द का उपयोग कर छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है, जबकि संस्थान सीहोर जिले में स्थित है। शिकायत में अन्य प्रशासनिक और शैक्षणिक अनियमितताओं के आरोप भी शामिल किए गए हैं।
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क्या है विवाद का केंद्र
एनएसयूआई का दावा है कि विश्वविद्यालय के नाम और उसकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति के बीच अंतर होने से छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिस पर आयोग ने संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब किया है। रवि परमार ने कहा कि आयोग द्वारा मामले को गंभीरता से लिया जाना छात्रों के हितों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़े सवालों की अहमियत को दर्शाता है। उनका कहना है कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
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पहले भी मांगा था जवाब, नहीं मिली रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार आयोग ने पहले भी यूजीसी और राज्य शासन से मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन तय समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद आयोग ने दोबारा नोटिस जारी कर मामले में प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
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एनएसयूआई नेता की शिकायत पर हुई कार्रवाई
यह मामला एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय अपने नाम में भोपाल शब्द का उपयोग कर छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है, जबकि संस्थान सीहोर जिले में स्थित है। शिकायत में अन्य प्रशासनिक और शैक्षणिक अनियमितताओं के आरोप भी शामिल किए गए हैं।
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एनएसयूआई का दावा है कि विश्वविद्यालय के नाम और उसकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति के बीच अंतर होने से छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिस पर आयोग ने संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब किया है। रवि परमार ने कहा कि आयोग द्वारा मामले को गंभीरता से लिया जाना छात्रों के हितों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़े सवालों की अहमियत को दर्शाता है। उनका कहना है कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
