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दूध से दिमाग तक पहुंचेगी दवा: एम्स भोपाल के चिकित्सकों का रिसर्च, दिमागी बीमारियों के इलाज में बड़ी सफलता

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Fri, 23 Jan 2026 06:24 PM IST
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सार

एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने दूध से मिलने वाले खास कणों की मदद से दवा को सीधे दिमाग तक पहुंचाने की तकनीक विकसित की है। यह खोज अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी दिमागी बीमारियों के इलाज में नई उम्मीद बन सकती है।

Medicine will reach the brain through milk: AIIMS Bhopal doctors' research shows major success in treating bra
एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एम्स भोपाल ने गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़ी कामयाबी हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने दूध से मिलने वाले खास कणों (एक्सोसोम) की मदद से दवाओं को सीधे दिमाग तक पहुंचाने की तकनीक विकसित की है। यह खोज अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी दिमाग से जुड़ी बीमारियों के इलाज में नई उम्मीद मानी जा रही है।
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क्यों खास है यह खोज
दिमाग तक दवा पहुंचाना आसान नहीं होता, क्योंकि बीच में एक मजबूत सुरक्षा परत होती है, जिसे रक्त-मस्तिष्क अवरोध कहा जाता है। एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि दूध से मिलने वाले एक्सोसोम इस बाधा को पार कर सकते हैं और दवा को सही जगह तक पहुंचा सकते हैं।
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एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि
जैवरसायन विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सुरेश मुखर्जी के नेतृत्व में हुए इस शोध में पाया गया कि दूध से बने एक्सोसोम शरीर के लिए सुरक्षित होते हैं और दूसरी तकनीकों की तुलना में कम नुकसान पहुंचाते हैं। इससे इलाज ज्यादा असरदार हो सकता है।

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न्यूरो बीमारियों में गेमचेंजर
शोध के मुताबिक, दिमाग से जुड़ी बीमारियों के इलाज में सबसे बड़ी परेशानी दवा को सही जगह तक पहुंचाना है। यह नई तकनीक इस परेशानी का समाधान बन सकती है और भविष्य में मरीजों के इलाज को आसान कर सकती है।
रिसर्च डे में पेश हुआ शोध यह अध्ययन एम्स भोपाल में आयोजित चौथे रिसर्च डे में पेश किया गया, जहां वैज्ञानिकों ने इसके मरीजों से जुड़े फायदों और आसान इस्तेमाल पर खास जोर दिया।


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दिमागी बीमारियों के इलाज में बड़ा बदलाव
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवनंद कर ने कहा कि यह खोज दिमागी बीमारियों के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है और यह दिखाती है कि एम्स भोपाल देश में नई और उपयोगी रिसर्च को आगे बढ़ा रहा है। भविष्य की चिकित्सा को नई दिशा वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले समय में इलाज को ज्यादा सुरक्षित, सस्ता और असरदार बना सकती है। दूध से दिमाग तक दवा पहुंचाने की यह खोज चिकित्सा विज्ञान में एक नई दिशा खोल रही है।
 
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