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अल्प वर्षा की आशंका पर अलर्ट मोहन सरकार, सीएम ने कहा- वैज्ञानिक खेती अपनाएं, किसानों को समय पर दें सही सलाह
Thu, 02 Jul 2026 08:01 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Thu, 02 Jul 2026 08:01 PM IST
सार
संभावित कम बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी विभागों को पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। किसानों को कम पानी वाली फसलें अपनाने, वैज्ञानिक खेती करने और समय पर सही सलाह देने पर सरकार विशेष जोर दे रही है।
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सीएम मोहन यादव ने संभावित अल्प वर्षा को लेकर की समीक्षा बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में संभावित अल्प वर्षा की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में कृषि, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित विभिन्न विभागों की तैयारियों का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें और किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संभावित कम बारिश को संकट नहीं, बल्कि बेहतर योजना और वैज्ञानिक खेती के अवसर के रूप में देखा जाए। उन्होंने अधिकारियों से किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों, जैसे ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर और कोदो-कुटकी की खेती के लिए प्रेरित करने को कहा। साथ ही किसानों को पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुवाई करने और नमी संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह देने के निर्देश भी दिए।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे जलाशयों की स्थिति, जल उपलब्धता और मौसम से जुड़ी जानकारी की रियल-टाइम निगरानी हो सके। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। सरकार ने अगले दो वर्षों के लिए व्यापक जल संरक्षण अभियान की रूपरेखा भी बनाई है। इसके तहत जलाभिषेक 2.0 अभियान में पुराने तालाब, बावड़ियों और कुओं का जीर्णोद्धार, मनरेगा के माध्यम से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन तथा भूजल पुनर्भरण के लिए चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब बनाए जाएंगे।
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बैठक में यह भी बताया गया कि प्रत्येक जिले के लिए आकस्मिक फसल योजना तैयार की जा रही है। फसल बीमा, डिजिटल क्रॉप सर्वे, सैटेलाइट आधारित क्षति आकलन और सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों को मौसम और खेती संबंधी सलाह लगातार उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और सरकार हर परिस्थिति में उन्हें तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएगी।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे जलाशयों की स्थिति, जल उपलब्धता और मौसम से जुड़ी जानकारी की रियल-टाइम निगरानी हो सके। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। सरकार ने अगले दो वर्षों के लिए व्यापक जल संरक्षण अभियान की रूपरेखा भी बनाई है। इसके तहत जलाभिषेक 2.0 अभियान में पुराने तालाब, बावड़ियों और कुओं का जीर्णोद्धार, मनरेगा के माध्यम से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन तथा भूजल पुनर्भरण के लिए चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब बनाए जाएंगे।
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