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MP विधानसभा: 54 विभागों में 1336 मामले लंबित, अपूर्ण उत्तरों में GAD टॉप पर; संसदीय कार्य विभाग का अलर्ट
Wed, 01 Jul 2026 06:38 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 01 Jul 2026 06:38 AM IST
सार
मध्य प्रदेश विधानसभा के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले 54 विभागों में विधानसभा से जुड़े 1336 मामले लंबित हैं। संसदीय कार्य विभाग ने सभी विभागों को लंबित जवाब और प्रकरणों का जल्द निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
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मध्य प्रदेश विधानसभा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार के विभिन्न विभाग विधानसभा से जुड़े मामलों का समय पर निराकरण करने में पीछे चल रहे हैं। राज्य के 54 विभागों में कुल 1336 मामले लंबित हैं। इनमें विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों के 832 अपूर्ण उत्तर, शून्यकाल के 86 मामले, 298 आश्वासन तथा लोक लेखा समिति (पीएसी) की 120 सिफारिशें शामिल हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा का 20 जुलाई से मानसून सत्र शुरू होने जा रहा हैं। इससे पहले संसदीय कार्य विभाग ने सभी विभागाें के प्रमुख सचिवों, अपर मुख्य सचिवों और विभागाध्यक्षों को लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण कर समय पर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आगामी विधानसभा सत्र से पहले लंबित प्रकरणों की संख्या कम की जा सके।
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सबसे अधिक लंबित मामले सामान्य प्रशासन विभाग में
जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग सबसे अधिक लंबित मामलों वाला विभाग है। यहां कुल 172 प्रकरण लंबित हैं। इनमें शून्यकाल के 5, अपूर्ण उत्तर 148, आश्वासन 18 और लोक लेखा समिति की 1 सिफारिश शामिल है। किसान कल्याण एवं कृषि विभाग दूसरे स्थान पर हैं। विभाग में कुल 154 मामले लंबित हैं। इनमें 2 शून्यकाल, 126 अपूर्ण उत्तर, 16 आश्वासन और लोक लेखा समिति की 10 सिफारिशें शामिल हैं।
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राजस्व, चिकित्सा शिक्षा और गृह विभाग भी पीछे नहीं
राजस्व विभाग में 122 मामले लंबित हैं। इनमें 14 शून्यकाल, 79 अपूर्ण उत्तर, 13 आश्वासन और 16 लोक लेखा समिति की सिफारिशें शामिल हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 121 मामले लंबित हैं। इनमें 6 शून्यकाल, 60 अपूर्ण उत्तर, 46 आश्वासन और 9 लोक लेखा समिति की सिफारिशें शामिल हैं। गृह विभाग में भी 115 मामले लंबित हैं। इनमें 83 अपूर्ण उत्तर और 32 आश्वासन शामिल हैं। इस विभाग में शून्यकाल और लोक लेखा समिति की कोई सिफारिश लंबित नहीं है। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कुल 57 मामले लंबित हैं। इनमें 9 शून्यकाल, 14 अपूर्ण उत्तर, 21 आश्वासन और 13 लोक लेखा समिति की सिफारिशें शामिल हैं।
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अपूर्ण उत्तर सबसे बड़ी चिंता
रिपोर्ट से साफ है कि विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों के 832 अपूर्ण उत्तर सबसे बड़ी चिंता का विषय हैं। इसके अलावा सदन में मंत्रियों द्वारा दिए गए 298 आश्वासन अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। वहीं, 120 लोक लेखा समिति की सिफारिशों पर भी कार्रवाई लंबित है। प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से प्रस्तावित है। ऐसे में संसदीय कार्य विभाग ने सभी विभागों को लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने और समय पर जवाब उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी न हो और सभी विभाग समयसीमा के भीतर जवाब भेजना सुनिश्चित करें।
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प्रमुख विभागों के लंबित मामले
विभाग कुल लंबित मामले
सामान्य प्रशासन - 172
किसान कल्याण एवं कृषि विकास - 154
राजस्व - 122
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा - 121
गृह - 115
पंचायत एवं ग्रामीण विकास - 57
54 विभागों का कुल - 1336
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कुल लंबित मामलों का विवरण
शून्यकाल : 86
अपूर्ण उत्तर : 832
आश्वासन : 298
लोक लेखा समिति की सिफारिशें : 120
कुल लंबित प्रकरण : 1336
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सबसे अधिक लंबित मामले सामान्य प्रशासन विभाग में
जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग सबसे अधिक लंबित मामलों वाला विभाग है। यहां कुल 172 प्रकरण लंबित हैं। इनमें शून्यकाल के 5, अपूर्ण उत्तर 148, आश्वासन 18 और लोक लेखा समिति की 1 सिफारिश शामिल है। किसान कल्याण एवं कृषि विभाग दूसरे स्थान पर हैं। विभाग में कुल 154 मामले लंबित हैं। इनमें 2 शून्यकाल, 126 अपूर्ण उत्तर, 16 आश्वासन और लोक लेखा समिति की 10 सिफारिशें शामिल हैं।
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राजस्व, चिकित्सा शिक्षा और गृह विभाग भी पीछे नहीं
राजस्व विभाग में 122 मामले लंबित हैं। इनमें 14 शून्यकाल, 79 अपूर्ण उत्तर, 13 आश्वासन और 16 लोक लेखा समिति की सिफारिशें शामिल हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 121 मामले लंबित हैं। इनमें 6 शून्यकाल, 60 अपूर्ण उत्तर, 46 आश्वासन और 9 लोक लेखा समिति की सिफारिशें शामिल हैं। गृह विभाग में भी 115 मामले लंबित हैं। इनमें 83 अपूर्ण उत्तर और 32 आश्वासन शामिल हैं। इस विभाग में शून्यकाल और लोक लेखा समिति की कोई सिफारिश लंबित नहीं है। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कुल 57 मामले लंबित हैं। इनमें 9 शून्यकाल, 14 अपूर्ण उत्तर, 21 आश्वासन और 13 लोक लेखा समिति की सिफारिशें शामिल हैं।
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अपूर्ण उत्तर सबसे बड़ी चिंता
रिपोर्ट से साफ है कि विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों के 832 अपूर्ण उत्तर सबसे बड़ी चिंता का विषय हैं। इसके अलावा सदन में मंत्रियों द्वारा दिए गए 298 आश्वासन अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। वहीं, 120 लोक लेखा समिति की सिफारिशों पर भी कार्रवाई लंबित है। प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से प्रस्तावित है। ऐसे में संसदीय कार्य विभाग ने सभी विभागों को लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने और समय पर जवाब उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी न हो और सभी विभाग समयसीमा के भीतर जवाब भेजना सुनिश्चित करें।
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प्रमुख विभागों के लंबित मामले
विभाग कुल लंबित मामले
सामान्य प्रशासन - 172
किसान कल्याण एवं कृषि विकास - 154
राजस्व - 122
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा - 121
गृह - 115
पंचायत एवं ग्रामीण विकास - 57
54 विभागों का कुल - 1336
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कुल लंबित मामलों का विवरण
शून्यकाल : 86
अपूर्ण उत्तर : 832
आश्वासन : 298
लोक लेखा समिति की सिफारिशें : 120
कुल लंबित प्रकरण : 1336
