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MP News: कुंभराज के धनिये, बरमान घाट के बैंगन और खरगोन की लालमिर्च समेत 12 वस्तुओं को एक साथ जीआई टैग
Tue, 30 Jun 2026 11:21 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 30 Jun 2026 11:21 PM IST
सार
मध्य प्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को जीआई टैग दिलाया है। इससे इन उत्पादों को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है।
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वल्लभ भवन, भोपाल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्य प्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश में पहली बार एक साथ उद्यानिकी फसलों समेत 12 वस्तुओं को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त किया है। इससे प्रदेश के किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने के साथ उनकी आय बढ़ाने का रास्ता भी मजबूत होगा। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य तय किया है। सरकार के अनुसार, जीआई टैग मिलने से संबंधित उत्पादों की विशिष्ट पहचान सुरक्षित होगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी और श्रीअन्न जैसी मूल्यवर्धित फसलों की खेती अपनाने का आह्वान किया है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती हो रही है।
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मालवा का आलू और गराड़ू, सिवनी का सीताफल शामिल
जिन उत्पादों को जीआई टैग मिला है उनमें गुना के कुंभराज का धनिया, नरसिंहपुर के बरमान घाट का बैंगन, बैतूल का गजरिया आम, खरगोन की लाल मिर्च, मांडू की खुरासानी इमली, जबलपुर की हरी मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर का गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम-सैलाना की बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल हैं।
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अलग स्वाद और सुगंध है विशेषाएं
इन उत्पादों की अपनी अलग गुणवत्ता, स्वाद, सुगंध और भौगोलिक विशेषताएं हैं। उदाहरण के लिए, कुम्भराज धनिया अपनी तेज खुशबू और उच्च गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है, जबकि सिवनी का सीताफल अपने बड़े आकार और स्वाद के कारण देशभर में पहचान बना चुका है। इसी तरह नूरजहां आम अपने असाधारण आकार और वजन के लिए जाना जाता है।
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इन वस्तुओं का भेजा प्रस्ताव
राज्य सरकार ने इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोकनगर की खिरनी को भी जीआई टैग दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। बता दें, जीआई टैग मिलने से प्रदेश के कृषि और उद्यानिकी उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत होगी, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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मालवा का आलू और गराड़ू, सिवनी का सीताफल शामिल
जिन उत्पादों को जीआई टैग मिला है उनमें गुना के कुंभराज का धनिया, नरसिंहपुर के बरमान घाट का बैंगन, बैतूल का गजरिया आम, खरगोन की लाल मिर्च, मांडू की खुरासानी इमली, जबलपुर की हरी मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर का गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम-सैलाना की बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल हैं।
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अलग स्वाद और सुगंध है विशेषाएं
इन उत्पादों की अपनी अलग गुणवत्ता, स्वाद, सुगंध और भौगोलिक विशेषताएं हैं। उदाहरण के लिए, कुम्भराज धनिया अपनी तेज खुशबू और उच्च गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है, जबकि सिवनी का सीताफल अपने बड़े आकार और स्वाद के कारण देशभर में पहचान बना चुका है। इसी तरह नूरजहां आम अपने असाधारण आकार और वजन के लिए जाना जाता है।
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इन वस्तुओं का भेजा प्रस्ताव
राज्य सरकार ने इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोकनगर की खिरनी को भी जीआई टैग दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। बता दें, जीआई टैग मिलने से प्रदेश के कृषि और उद्यानिकी उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत होगी, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
