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MP News: पूर्व एसबीआई अधिकारी की तीन करोड़ की संपत्ति ईडी ने की अटैच, आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई

Thu, 11 Jun 2026 06:57 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 11 Jun 2026 06:57 PM IST
सार

ईडी ने आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एसबीआई के पूर्व एजीएम अनिल कुमार जैन की 3.01 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध नकद जमा और फर्जी लेन-देन का खुलासा हुआ है।

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MP News: ED attaches assets worth ₹3 crore of former SBI official; action taken in disproportionate assets cas
ईडी - फोटो : ईडी

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) अनिल कुमार जैन की करीब 3.01 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है। ईडी ने यह जांच सीबीआई, एसीबी भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। अनिल कुमार जैन पर अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। जांच में सामने आया कि अप्रैल 2017 से दिसंबर 2018 के बीच अनिल कुमार जैन ने अपनी वैध आय की तुलना में करीब 481 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की। ईडी के अनुसार, यह संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से मेल नहीं खाती।
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बैंक खातों में जमा किए गए करोड़ों रुपये
जांच के दौरान पता चला कि अनिल कुमार जैन और उनके परिवार के बैंक खातों में करीब 2.35 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे। इन जमा राशियों को संपत्ति बिक्री से प्राप्त रकम बताया गया, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि इन नकद जमा राशियों को बाद में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में बदल दिया गया। इसके अलावा करीब 66 लाख रुपये की एफडी भी आय से अधिक संपत्ति के रूप में पाई गई। 
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हवाला और फर्जी कंपनी के इस्तेमाल का आरोप
ईडी के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि अनिल कुमार जैन ने कथित तौर पर हवाला ऑपरेटरों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से अवैध धन को वैध आय के रूप में दिखाने की कोशिश की। इसके लिए एक निजी कंपनी एक्सीलेंट इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संपत्ति बिक्री का दिखावटी लेन-देन किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी का कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि से संबंध नहीं था और उसके निदेशकों में से एक अखिलेश चौधरी कथित रूप से डमी डायरेक्टर के रूप में काम कर रहा था। ईडी ने कहा कि अपराध से अर्जित आय को सुरक्षित रखने और उसकी बिक्री या हस्तांतरण रोकने के लिए करीब 3.01 करोड़ रुपये की एफडी को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।
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