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MP News: 800 करोड़ के कथित पोषण आहार घोटाले में लोकायुक्त सख्त, तीन विभागों के अधिकारियों को किया तलब
Sun, 05 Jul 2026 05:06 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 05 Jul 2026 05:06 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के कथित 800 करोड़ रुपये के पोषण आहार घोटाले में लोकायुक्त ने सख्ती दिखाई है। कार्रवाई रिपोर्ट नहीं देने पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास और ग्रामीण आजीविका मिशन के शीर्ष अधिकारियों को 24 अगस्त को तलब किया गया है।
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लोकायुक्त कार्यालय भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के चर्चित पोषण आहार के कथित 800 करोड़ रुपये के घोटाले में लोकायुक्त ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के शीर्ष अधिकारियों को 24 अगस्त 2026 को कार्रवाई प्रतिवेदन (एक्शन टेकन रिपोर्ट) के साथ लोकायुक्त कार्यालय में उपस्थित होने को कहा गया हैं। यह मामला पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा वर्ष 2023 में की गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में महालेखाकार (एजी) की वर्ष 2018 से 2021 के बीच आठ जिलों में हुई जांच के आधार पर करीब 800 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया गया था। इसमें तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, तत्कालीन सीईओ एवं संचालक ललित मोहन बेलवाल सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी।
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तीन साल में 14 बार मांगी रिपोर्ट
लोकायुक्त कार्यालय के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से महालेखाकार की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगने के लिए अब तक 14 पत्र भेजे जा चुके हैं। पहला पत्र 30 अक्टूबर 2023 को और सबसे हाल का पत्र 23 जून 2026 को भेजा गया। इसके बावजूद विभाग अब तक कार्रवाई प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं करा सका।
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विभाग ने पांच बार मांगा अतिरिक्त समय
मामले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अलग-अलग समय पर पांच बार अतिरिक्त समय भी मांगा। विभाग ने नवंबर 2023 से मार्च 2025 के बीच कई बार एक से दो महीने का समय बढ़ाने का अनुरोध किया। लोकायुक्त ने हर बार समय दिया, लेकिन तय अवधि पूरी होने के बाद भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
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महिला एवं बाल विकास विभाग की जानकारी पर भी सवाल
लोकायुक्त ने महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 8 जून 2026 को भेजी गई जानकारी को भी संतोषजनक नहीं माना। लोकायुक्त की टिप्पणी में कहा गया कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी मांगी गई जानकारी के अनुरूप नहीं है और उसमें विरोधाभास है। इसके बाद विभाग के प्रमुख सचिव और ग्रामीण आजीविका मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी 24 अगस्त को रिकॉर्ड सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। पूर्व विधायक पारस सकलेचा की शिकायत में तत्कालीन अधिकारियों की कथित नियम विरुद्ध संविदा नियुक्ति, वित्तीय अधिकार दिए जाने, जांच में प्रतिकूल टिप्पणियों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने तथा शिकायत करने वाले अधिकारियों को प्रताड़ित किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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पारस सकलेचा बोले- जवाबदेही तय होना जरूरी
पारस सकलेचा ने कहा कि यदि किसी विभाग को बार-बार समय देने के बाद भी वह वर्षों तक कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करता, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही और जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 24 अगस्त की सुनवाई में संबंधित विभाग पूरे दस्तावेजों और तथ्यों के साथ लोकायुक्त के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि पोषण आहार जैसी योजना सीधे प्रदेश की लाखों महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी है, इसलिए इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या जांच में देरी जनहित से जुड़ा गंभीर विषय है।
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तीन साल में 14 बार मांगी रिपोर्ट
लोकायुक्त कार्यालय के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से महालेखाकार की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगने के लिए अब तक 14 पत्र भेजे जा चुके हैं। पहला पत्र 30 अक्टूबर 2023 को और सबसे हाल का पत्र 23 जून 2026 को भेजा गया। इसके बावजूद विभाग अब तक कार्रवाई प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं करा सका।
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विभाग ने पांच बार मांगा अतिरिक्त समय
मामले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अलग-अलग समय पर पांच बार अतिरिक्त समय भी मांगा। विभाग ने नवंबर 2023 से मार्च 2025 के बीच कई बार एक से दो महीने का समय बढ़ाने का अनुरोध किया। लोकायुक्त ने हर बार समय दिया, लेकिन तय अवधि पूरी होने के बाद भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
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महिला एवं बाल विकास विभाग की जानकारी पर भी सवाल
लोकायुक्त ने महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 8 जून 2026 को भेजी गई जानकारी को भी संतोषजनक नहीं माना। लोकायुक्त की टिप्पणी में कहा गया कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी मांगी गई जानकारी के अनुरूप नहीं है और उसमें विरोधाभास है। इसके बाद विभाग के प्रमुख सचिव और ग्रामीण आजीविका मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी 24 अगस्त को रिकॉर्ड सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। पूर्व विधायक पारस सकलेचा की शिकायत में तत्कालीन अधिकारियों की कथित नियम विरुद्ध संविदा नियुक्ति, वित्तीय अधिकार दिए जाने, जांच में प्रतिकूल टिप्पणियों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने तथा शिकायत करने वाले अधिकारियों को प्रताड़ित किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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पारस सकलेचा बोले- जवाबदेही तय होना जरूरी
पारस सकलेचा ने कहा कि यदि किसी विभाग को बार-बार समय देने के बाद भी वह वर्षों तक कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करता, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही और जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 24 अगस्त की सुनवाई में संबंधित विभाग पूरे दस्तावेजों और तथ्यों के साथ लोकायुक्त के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि पोषण आहार जैसी योजना सीधे प्रदेश की लाखों महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी है, इसलिए इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या जांच में देरी जनहित से जुड़ा गंभीर विषय है।
