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MP News: एनएचआरसी ने ‘एनालॉग पनीर’ पर मांगे जवाब, एफएसएसएआई और राज्यों को दो हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट

Fri, 14 Aug 2026 08:40 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 14 Aug 2026 08:40 AM IST
सार

एनएचआरसी ने बाजार में बिक रहे एनालॉग पनीर को लेकर सवाल उठाए हैं। आयोग ने एफएसएसएआई और सभी राज्यों से इसकी गुणवत्ता, बिक्री और जांच से जुड़ी जानकारी मांगी है।

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MP News: NHRC seeks response on ‘analog paneer’; FSSAI and states must submit report within two weeks.
मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो

विस्तार

दूध से बनने वाले पारंपरिक पनीर के विकल्प के रूप में बाजार में बिक रहे एनालॉग पनीर को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीर चिंता जताई है। आयोग की बेंच ने इस मामले में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से विस्तृत जानकारी मांगी है। मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व वाली बेंच ने एनालॉग पनीर के निर्माण, लाइसेंस, बिक्री और उपभोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। आयोग का कहना है कि इस उत्पाद की संरचना, पोषण मूल्य, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिलने जैसे मुद्दों की जांच जरूरी है। आयोग ने प्रश्न उठाया है कि यदि किसी उत्पाद की संरचना पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग है, तो उसे पनीर के विकल्प के रूप में बनाने और बेचने का नियामकीय और पोषण संबंधी आधार क्या है।
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फएसएसएआई से मांगी गई विस्तृत जानकारी
एनएचआरसी ने एफएसएसएआई से एनालॉग पनीर की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। आयोग ने यह भी पूछा है कि इस उत्पाद के निर्माण के लिए कौन-से मानक निर्धारित किए गए हैं और इसकी संरचना में किन घटकों के इस्तेमाल की अनुमति है। इसके अलावा आयोग ने पोषण संबंधी प्रभाव, स्वास्थ्य से जुड़े संभावित जोखिम, गुणवत्ता जांच के मानकों और परीक्षण की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी मांगी है।
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वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया पर भी सवाल
आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि दूध से बने पनीर और वनस्पति तेल, वसा तथा अन्य गैर-दुग्ध पदार्थों से तैयार उत्पादों के बीच अंतर करने के लिए कौन-सी वैज्ञानिक परीक्षण पद्धति अपनाई जाती है। बेंच ने विशेष रूप से बीटा-सिटोस्टेरोल की भूमिका और उसकी उपयोगिता के बारे में भी जानकारी मांगी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऐसे उत्पादों की पहचान किस प्रकार की जाती है। 

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राज्यों से मांगा कार्रवाई का पूरा ब्योरा
एनएचआरसी ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भी नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे एनालॉग पनीर के निर्माण, आपूर्ति, बिक्री और होटलों या अन्य प्रतिष्ठानों में इसके उपयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। इसके साथ ही निरीक्षण, खाद्य नमूनों की जांच, नियमों के उल्लंघन और अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण भी मांगा गया है।

उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल रही है या नहीं?
आयोग ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक संरचना और उसके पोषण संबंधी गुणों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा रही है। आयोग का मानना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में सही जानकारी मिलना उपभोक्ताओं का अधिकार है, ताकि वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें।

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दो सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
एनएचआरसी ने संबंधित सभी अधिकारियों को नोटिस मिलने के दो सप्ताह के भीतर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला एडवांस्ड स्टडी इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया (ASIA) के सेंटर फॉर हेल्थ इक्विटी की ओर से दायर शिकायत के बाद आयोग के सामने आया। शिकायत के साथ एनालॉग पनीर को लेकर रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई थी। आयोग ने शिकायत और रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों का अध्ययन करने के बाद इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच शुरू की है।
 
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