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MP News: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में दो बच्चों की सीमा खत्म, सीएम यादव ने नियम का ड्राफ्ट निरस्त किया
Tue, 09 Jun 2026 08:12 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 09 Jun 2026 08:12 PM IST
सार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी नौकरी में दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़े प्रस्तावित नियम को निरस्त कर दिया है। अब इस प्रावधान को हटाकर नया प्रारूप तैयार किया जाएगा।
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वल्लभ भवन, भोपाल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी नौकरी से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम के उस प्रस्तावित प्रारूप को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र मानने का प्रावधान शामिल था। मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिए हैं कि इस प्रारूप को तत्काल निरस्त कर पोर्टल से हटाया जाए और दो बच्चों की सीमा संबंधी प्रावधान हटाकर नया प्रारूप तैयार कर प्रकाशित किया जाए।
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दरअसल, वर्ष 2001 में लागू व्यवस्था के तहत 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों की सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के लिए भी दो से अधिक बच्चे होना आचरण नियमों के तहत कदाचार की श्रेणी में रखा गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित नए नियमों में इस तरह की बाध्यता नहीं रखी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दो से अधिक संतान होने पर सरकारी सेवा के लिए अपात्र माने जाने वाले प्रावधान को पूरी तरह हटाकर नया प्रारूप तैयार किया जाए।
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सरकार के इस फैसले को सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के लिए भी सरकारी सेवा के अवसर उपलब्ध रहेंगे।
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दरअसल, वर्ष 2001 में लागू व्यवस्था के तहत 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों की सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के लिए भी दो से अधिक बच्चे होना आचरण नियमों के तहत कदाचार की श्रेणी में रखा गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित नए नियमों में इस तरह की बाध्यता नहीं रखी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दो से अधिक संतान होने पर सरकारी सेवा के लिए अपात्र माने जाने वाले प्रावधान को पूरी तरह हटाकर नया प्रारूप तैयार किया जाए।
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सरकार के इस फैसले को सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के लिए भी सरकारी सेवा के अवसर उपलब्ध रहेंगे।
