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वीर भारत न्यास विवाद: जीतू पटवारी को भेजा 5 करोड़ का मानहानि नोटिस, तीन दिन में माफी मांगने की मांग की
Sat, 04 Jul 2026 06:32 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 04 Jul 2026 06:32 PM IST
सार
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा वीर भारत न्यास को एक रुपये में 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन दिए जाने के आरोपों का मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजकर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने या सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की गई है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता और अधिवक्ता गुंजन चौकसे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वीर भारत न्यास ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई शुरू कर दी है। न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता के माध्यम से जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया है। आरोप है कि पटवारी ने बिना तथ्यों के ऐसे बयान दिए, जिससे न्यास और उसके पदाधिकारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता के अनुसार, जीतू पटवारी को तीन दिन के भीतर अपने बयान पर स्पष्टीकरण देना होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी, अन्यथा उनके खिलाफ न्यायालय में मानहानि का दावा दायर किया जाएगा। एडवोकेट मेहता ने कहा कि बिना किसी ठोस तथ्य के लगाए गए आरोपों से मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार एवं न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की व्यक्तिगत, सामाजिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। इसलिए हमने जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। पटवारी से सार्वजनिक रूप से अपने आरोप वापस लेने, माफी मांगने अथवा लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यदि निर्धारित समय सीमा में ऐसा नहीं किया जाता, तो श्रीराम तिवारी की ओर से सक्षम न्यायालय में मानहानि का दावा सहित अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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जीतू पटवारी ने लगाया था यह आरोप
हाल ही में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपये में वीर भारत न्यास के सचिव और मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकर श्रीराम तिवारी से जुड़े एक ट्रस्ट को आवंटित कर दी। उन्होंने इस मामले में सरकार पर पक्षपात और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। पटवारी के आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया था। हालांकि बाद में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस मामले पर अलग राय रखते हुए कहा था कि संबंधित जमीन एक सरकारी ट्रस्ट से जुड़ी व्यवस्था के तहत है, जिसके बाद कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग बयान सामने आए थे।
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वीर भारत न्यास शासकीय
वीर भारत न्यास को लेकर बताया गया कि यह अप्रैल 2013 में स्थापित मध्यप्रदेश शासन का पूर्ण सार्वजनिक न्यास है। उज्जैन का कोठी महल परिसर शासकीय संपत्ति है, जिसे विधिवत प्रक्रिया के तहत राजस्व विभाग ने संस्कृति विभाग को न्यास के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। न्यास भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास के संरक्षण व शोध के लिए कार्यरत है तथा पिछले डेढ़ वर्ष में 7 हजार से अधिक पृष्ठों का शोध साहित्य प्रकाशित किया है। न्यास की तरफ से संबंधित भूमि पर संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है।
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जीतू पटवारी ने लगाया था यह आरोप
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