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MP News: प्रदेश के 46 जिलों में एटीएस नहीं, मैनुअल फिटनेस जारी रखने का परिवहन मंत्री ने केंद्र से किया आग्रह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 08 Jan 2026 07:49 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से 46 जिलों में अभी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की सुविधा नहीं है। ऐसे में वाहन मालिकों की परेशानी को देखते हुए परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने केंद्र सरकार से मैनुअल वाहन फिटनेस प्रक्रिया जारी रखने का आग्रह किया है।
परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा जिला परिवहन कार्यालयों में वाहनों की मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया समाप्त कर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से ही वाहन फिटनेस कराए जाने का प्रावधान किया है। हालांकि मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से फिलहाल केवल 9 जिलों में ही एटीएस की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 46 जिलों में अभी यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। इस स्थिति को देखते हुए परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने केंद्र सरकार से मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया को जारी रखने का आग्रह किया है।
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परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुलाकात के दौरान परिवहन मंत्री सिंह ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 1 जनवरी 2026 को जारी पत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत जिला परिवहन कार्यालयों में वाहनों की मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया को समाप्त कर केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के माध्यम से फिटनेस परीक्षण किए जाने का प्रावधान किया गया है।
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मध्य प्रदेश में वर्तमान में प्रदेश के ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, सतना, सिंगरौली, देवास और धार जिलों में एटीएस संचालित हैं, जहां वाहन फिटनेस पूरी तरह से ऑटोमेटेड प्रणाली से की जा रही है। इसके अलावा प्रदेश के शेष जिलों में एटीएस की सुविधा उपलब्ध नहीं है। परिवहन मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से एक बड़ा राज्य है, जहां कई जिलों के बीच की दूरी 150 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में एटीएस विहीन जिलों के वाहन स्वामियों को फिटनेस परीक्षण के लिए दूसरे जिलों में वाहन ले जाना पड़ता है, जिससे समय अधिक लगता है और ईंधन खर्च भी बढ़ता है।
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उन्होंने यह भी बताया कि यात्री वाहनों के परमिट निर्धारित मार्गों और क्षेत्रों के लिए जारी किए जाते हैं। ऐसे में परमिट मार्ग से बाहर जाकर फिटनेस परीक्षण कराना वैधानिक दृष्टि से भी उपयुक्त नहीं है। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिवहन मंत्री सिंह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से आग्रह किया कि जब तक प्रदेश के सभी जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो जाते, तब तक एटीएस विहीन जिलों में जिला परिवहन कार्यालयों के माध्यम से मैनुअल वाहन फिटनेस प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी जाए। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस विषय पर सहमति व्यक्त करते हुए प्रक्रिया को शीघ्र अनुमति प्रदान करने का आश्वासन दिया।
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परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुलाकात के दौरान परिवहन मंत्री सिंह ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 1 जनवरी 2026 को जारी पत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत जिला परिवहन कार्यालयों में वाहनों की मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया को समाप्त कर केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के माध्यम से फिटनेस परीक्षण किए जाने का प्रावधान किया गया है।
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उन्होंने यह भी बताया कि यात्री वाहनों के परमिट निर्धारित मार्गों और क्षेत्रों के लिए जारी किए जाते हैं। ऐसे में परमिट मार्ग से बाहर जाकर फिटनेस परीक्षण कराना वैधानिक दृष्टि से भी उपयुक्त नहीं है। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिवहन मंत्री सिंह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से आग्रह किया कि जब तक प्रदेश के सभी जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित नहीं हो जाते, तब तक एटीएस विहीन जिलों में जिला परिवहन कार्यालयों के माध्यम से मैनुअल वाहन फिटनेस प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी जाए। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस विषय पर सहमति व्यक्त करते हुए प्रक्रिया को शीघ्र अनुमति प्रदान करने का आश्वासन दिया।

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