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MP News: पेयजल आपूर्ति में नहीं होगी कोई कमी, सीएम बोले- मार्च 2028 से पहले पूरा होगा जल जीवन मिशन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 02 Jun 2026 09:08 PM IST
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सार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पेयजल आपूर्ति को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को हर घर तक निर्बाध पानी पहुंचाने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति, जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
पीएचई विभाग की समीक्षा बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पेयजल आपूर्ति को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को हर घर तक निर्बाध पानी पहुंचाने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में जल जीवन मिशन, जल संरक्षण और ग्रामीण जल योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में हर नागरिक को पर्याप्त और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंगलवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाए और जहां पानी की कमी की स्थिति बने, वहां तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने नल-जल योजनाओं के सुचारू संचालन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी गांव या क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सूख चुके जल स्रोतों की जांच कराने और जल संकट वाले क्षेत्रों में तत्काल समाधान के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने उन ग्राम पंचायतों और गांवों को सम्मानित करने की बात भी कही, जिन्होंने अपने स्तर पर नल-जल योजनाओं का सफल संचालन किया है।
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लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तिया उइके ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और मार्च 2028 से पहले हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। उज्जैन संभाग सहित प्रदेश के 11 जिलों में मिशन का शत-प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अब तक 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल के माध्यम से जल उपलब्ध कराया जा रहा है और करीब 75 प्रतिशत परिवार इस योजना के दायरे में आ चुके हैं।
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बैठक में बोरवेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बनाए गए बोरवेल अधिनियम की भी जानकारी दी गई। मंत्री उइके ने बताया कि इस तरह का कानून लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत डिंडौरी और मंडला जिलों में 8 हजार से अधिक एकल ग्राम नल-जल योजनाओं का कार्य पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल स्रोतों के लिए केवल ट्यूबवेल पर निर्भर रहने के बजाय तालाबों और सरोवरों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाए, ताकि जल संरक्षण के साथ भूजल स्तर भी बेहतर हो सके। उन्होंने जल संरक्षण में योगदान देने वाले लोगों और संस्थाओं को राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मानित करने के निर्देश भी दिए।
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16.50 लाख घरेलू नल कनेक्शन दिए
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में दिसंबर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक नए घरेलू नल कनेक्शन दिए गए हैं और 15 हजार से अधिक नए हैंडपंप एवं नलकूप स्थापित किए गए हैं। साथ ही 14 हजार 200 गांवों को हर घर जल घोषित किया जा चुका है। विभाग ने अक्टूबर 2026 में प्रदेशव्यापी जल उत्सव आयोजित करने की भी जानकारी दी। इसके अलावा जल जीवन मिशन की योजनाओं की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीक, आईओटी सेंसर और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना की तैयारी भी की जा रही है।
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लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तिया उइके ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और मार्च 2028 से पहले हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। उज्जैन संभाग सहित प्रदेश के 11 जिलों में मिशन का शत-प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अब तक 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल के माध्यम से जल उपलब्ध कराया जा रहा है और करीब 75 प्रतिशत परिवार इस योजना के दायरे में आ चुके हैं।
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16.50 लाख घरेलू नल कनेक्शन दिए
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में दिसंबर 2023 से अब तक 16.50 लाख से अधिक नए घरेलू नल कनेक्शन दिए गए हैं और 15 हजार से अधिक नए हैंडपंप एवं नलकूप स्थापित किए गए हैं। साथ ही 14 हजार 200 गांवों को हर घर जल घोषित किया जा चुका है। विभाग ने अक्टूबर 2026 में प्रदेशव्यापी जल उत्सव आयोजित करने की भी जानकारी दी। इसके अलावा जल जीवन मिशन की योजनाओं की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीक, आईओटी सेंसर और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना की तैयारी भी की जा रही है।

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