{"_id":"69d262177fb64aa5f60eda5e","slug":"mp-news-vikramaditya-vedic-clock-installed-in-kashi-vishwanath-temple-will-give-a-boost-to-indian-chronolo-2026-04-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: काशी विश्वनाथ मंदिर में लगी ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’, भारतीय कालगणना को मिलेगा बढ़ावा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: काशी विश्वनाथ मंदिर में लगी ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’, भारतीय कालगणना को मिलेगा बढ़ावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 05 Apr 2026 06:52 PM IST
विज्ञापन
सार
काशी विश्वनाथ मंदिर में ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ स्थापित की गई है, जो भारतीय कालगणना को दर्शाती है। सीएम मोहन यादव की पहल पर उज्जैन के बाद अब वाराणसी में भी यह घड़ी लगाई गई है।
काशी में लगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
भारतीय संस्कृति और कालगणना की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। यह घड़ी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर उज्जैन के बाद अब वाराणसी में लगाई गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 3 अप्रैल को यह घड़ी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी। इसके बाद 4 अप्रैल को विधि-विधान के साथ इसे मंदिर परिसर में स्थापित किया गया।
ये भी पढ़ें- MP News: प्रदेश के 126 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना की सूची से बाहर, नहीं थी एनएबीएच की मान्यता
बता दें यह घड़ी सिर्फ समय नहीं बताती, बल्कि भारतीय परंपरागत कालगणना का आधुनिक रूप है। यह सूर्योदय के आधार पर समय बताती है और दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसके जरिए तिथि, नक्षत्र, योग, पंचांग और ग्रहों की स्थिति जैसी जानकारियां भी मिलती हैं। इस घड़ी को उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ ने तैयार किया है। इससे पहले उज्जैन में भी इसे स्थापित किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों, जैसे ज्योतिर्लिंग और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भी इस तरह की वैदिक घड़ी लगाई जाए, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ सके।
ये भी पढ़ें- विस के पूर्व अध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा को श्रद्धांजलि: CM बोले-संसदीय परंपराओं के प्रति उनका जीवन समर्पित रहा
Trending Videos
ये भी पढ़ें- MP News: प्रदेश के 126 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना की सूची से बाहर, नहीं थी एनएबीएच की मान्यता
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें यह घड़ी सिर्फ समय नहीं बताती, बल्कि भारतीय परंपरागत कालगणना का आधुनिक रूप है। यह सूर्योदय के आधार पर समय बताती है और दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसके जरिए तिथि, नक्षत्र, योग, पंचांग और ग्रहों की स्थिति जैसी जानकारियां भी मिलती हैं। इस घड़ी को उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ ने तैयार किया है। इससे पहले उज्जैन में भी इसे स्थापित किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों, जैसे ज्योतिर्लिंग और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भी इस तरह की वैदिक घड़ी लगाई जाए, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ सके।
ये भी पढ़ें- विस के पूर्व अध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा को श्रद्धांजलि: CM बोले-संसदीय परंपराओं के प्रति उनका जीवन समर्पित रहा

कमेंट
कमेंट X