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सिंहस्थ 2028: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन में बनेगा 800 मीटर का स्काईवॉक, 70 करोड़ रुपए होंगे खर्च
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 11 Apr 2026 10:24 AM IST
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सार
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम तेज कर दिया है। उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्काईवॉक, AI निगरानी और आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
उज्जैन में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट हब से लेकर रेलवे स्टेशन तक स्काईवॉक का निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश सरकार ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में सरकार ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर चर्चा की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में एक आधुनिक स्काईवॉक बनाने की योजना तैयार की गई है, जिस पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग द्वारा प्रस्तावित यह स्काईवॉक इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट हब से लेकर रेलवे स्टेशन तक बनाया जाएगा। इसकी लंबाई लगभग 800 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर होगी। यह ऊंचा वॉकवे विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सुरक्षित और आसान आवागमन सुनिश्चित करेगा। सिंहस्थ के सुचारू संचालन के लिए करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से मेला कार्यालय भी बनाया जाएगा। इसके अलावा क्राउड कंट्रोल, ट्रैफिक मैनेजमेंट और रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने के लिए आईआईएम नागपुर के साथ लगभग 14 करोड़ रुपये का एमओयू किया जाएगा।
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ट्रैफिक का दबाव होगा कम
स्काईवॉक बनने से श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ वाली सड़कों पर चलने की जरूरत कम होगी। इससे ट्रैफिक का दबाव घटेगा और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी। एलिवेटेड वॉकवे के कारण वाहन और पैदल यात्री अलग-अलग रहेंगे, जिससे व्यवस्था बेहतर बनेगी। इसके अलावा, इसमें एस्केलेटर, लिफ्ट और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि सभी वर्ग के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें।
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AI से होगी रियल टाइम निगरानी
सिंहस्थ मेले में भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए लगभग 140 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। यह केंद्र पूरे मेले की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस स्थान पर कितनी भीड़ है, जिससे उसी अनुसार व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन किया जा सकेगा। आपात स्थिति में पुलिस, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन टीमों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।
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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मोबाइल एप हो रहा विकसित
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक मोबाइल ऐप भी विकसित किया जाएगा, जिसके जरिए रूट, पार्किंग, आवागमन और अन्य जरूरी जानकारी आसानी से मिल सकेगी। साथ ही कचरा प्रबंधन, पानी की आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था पर भी डिजिटल निगरानी रखी जाएगी। साइबर सुरक्षा के जरिए सभी तकनीकी सिस्टम को सुरक्षित रखा जाएगा।
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ट्रैफिक का दबाव होगा कम
स्काईवॉक बनने से श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ वाली सड़कों पर चलने की जरूरत कम होगी। इससे ट्रैफिक का दबाव घटेगा और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी। एलिवेटेड वॉकवे के कारण वाहन और पैदल यात्री अलग-अलग रहेंगे, जिससे व्यवस्था बेहतर बनेगी। इसके अलावा, इसमें एस्केलेटर, लिफ्ट और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि सभी वर्ग के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें।
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AI से होगी रियल टाइम निगरानी
सिंहस्थ मेले में भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए लगभग 140 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। यह केंद्र पूरे मेले की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस स्थान पर कितनी भीड़ है, जिससे उसी अनुसार व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन किया जा सकेगा। आपात स्थिति में पुलिस, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन टीमों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।
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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मोबाइल एप हो रहा विकसित
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक मोबाइल ऐप भी विकसित किया जाएगा, जिसके जरिए रूट, पार्किंग, आवागमन और अन्य जरूरी जानकारी आसानी से मिल सकेगी। साथ ही कचरा प्रबंधन, पानी की आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था पर भी डिजिटल निगरानी रखी जाएगी। साइबर सुरक्षा के जरिए सभी तकनीकी सिस्टम को सुरक्षित रखा जाएगा।

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