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MP Rajya Sabha Election: कौन हैं अरविंद शर्मा? जिनके फैसले से बदल गया एमपी राज्यसभा चुनाव का समीकरण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 11 Jun 2026 05:55 PM IST
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सार

मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा चर्चा में हैं। उनके फैसले से चुनाव का पूरा गणित बदल गया और भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए।

MP Rajya Sabha Election: Who is Arvind Sharma? The man whose single decision altered the entire equation of th
एमपी विधानसभा प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा प्रमाण पत्र देते हुए। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद विधानसभा के प्रमुख सचिव एवं रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। उनके फैसले के बाद मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित बदल गया और भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन सुनिश्चित हो गया। राज्यसभा चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उम्मीदवारों के नामांकन पत्र स्वीकार करना, उनकी जांच करना और चुनाव प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप संपन्न कराना उनकी जिम्मेदारी होती है। किसी नामांकन में नियमों के विपरीत त्रुटि मिलने पर उसे निरस्त करने का अधिकार भी रिटर्निंग ऑफिसर के पास होता है। 



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विधानसभा के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में शामिल
अरविंद शर्मा वर्तमान में मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव हैं। विधानसभा अध्यक्ष के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में प्रमुख सचिव का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्यसभा चुनाव के दौरान विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव ही रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी निभाते हैं। 5 जनवरी 1965 को दिल्ली में जन्मे अरविंद शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। 
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संसद में 36 वर्षों का अनुभव
अरविंद शर्मा ने अप्रैल 1989 में लोकसभा सचिवालय से अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने अवर सचिव के रूप में सेवा शुरू की और बाद में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। संसद की कार्यप्रणाली और संसदीय प्रक्रियाओं का उन्हें तीन दशक से अधिक का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संसदीय कार्यक्रमों और अध्ययन दौरों में भी भाग लिया। 

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प्रतिनियुक्ति पर आए, फिर बने प्रमुख सचिव
मार्च 2024 में अरविंद शर्मा प्रतिनियुक्ति पर मध्यप्रदेश विधानसभा पहुंचे थे। बाद में 1 अक्टूबर 2025 को उन्हें विधानसभा का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया। तब से वे विधानसभा की प्रशासनिक और संसदीय व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ, महेश केवट और रजनीश अग्रवाल निर्वाचित घोषित किए गए हैं। इन तीनों को जारी किए गए निर्वाचन प्रमाणपत्रों पर भी रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में अरविंद शर्मा के हस्ताक्षर हैं। 

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ऐसे बदला राज्यसभा चुनाव का गणित
मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों में से दो भाजपा और एक कांग्रेस के खाते की सीट मानी जा रही थी। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी। भाजपा के पास अपने दम पर दो सीटें जीतने लायक संख्या थी, जबकि तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों की जरूरत पड़ती। दूसरी ओर, कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या से अधिक विधायक मौजूद थे। कांग्रेस ने तीसरी सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि नामांकन पत्र में एक न्यायालय द्वारा जारी समन की जानकारी नहीं दी गई है। कांग्रेस ने तर्क दिया कि संबंधित मामले में न तो कोई एफआईआर दर्ज है और न ही कोई आपराधिक मुकदमा लंबित है, इसलिए समन का उल्लेख आवश्यक नहीं था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने जानकारी छिपाए जाने को आधार मानते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया। इसके बाद राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण बदल गया और भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।
 
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