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MP Weather Today: मानसून की रफ्तार तेज,46 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट,72 घंटे में पूरे प्रदेश में देगा दस्तक
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 25 Jun 2026 07:06 AM IST
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सार
मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री के बाद मौसम तेजी से बदल रहा है। प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में मानसून सबसे आखिर में पहुंचेगा।
मौसम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में मानसून ने आखिरकार दस्तक दे दी है और अब अगले दो से तीन दिनों में प्रदेश का अधिकांश हिस्सा इसकी चपेट में आने वाला है। मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर-चंबल संभाग प्रदेश का ऐसा क्षेत्र रहेगा, जहां मानसून सबसे आखिर में पहुंचेगा। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश के 15 जिलों में मानसून सक्रिय हो चुका है। मानसूनी सिस्टम के मजबूत होने से भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़, इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, सागर और बुंदेलखंड के कई जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी भी गर्मी और उमस बनी रहेगी। नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में दिनभर उमस भरा मौसम रहने का अनुमान है, जबकि सीधी जिले में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है।
इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून
मौसम विभाग ने अलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा।
नौ दिन की देरी से हुई एंट्री
मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य आगमन तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार यह 24 जून को पहुंचा। यानी मानसून निर्धारित समय से करीब नौ दिन देरी से आया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि वर्षा की मात्रा, नमी वाली हवाओं की दिशा और उनके प्रभाव क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटों के दौरान 75 मिमी से अधिक बारिश दर्ज होने के साथ दक्षिणी सीमावर्ती जिलों में लगातार सक्रिय मानसूनी गतिविधियां देखी गईं, जिसके बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की गई।
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यह भी पढ़ें-नौ दिन की देरी से पहुंचा, अगले चार दिन में प्रदेश के अधिकांश हिस्से होंगे तरबतर
बारिश का कोटा अभी भी आधा अधूरा
मानसून के देर से आने का असर शुरुआती सीजन पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में 1 जून से 24 जून तक औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर सहित 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।
इस साल कम बरसात की आशंका
भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत 47 जिलों में बारिश का स्तर औसत से नीचे रहने का अनुमान है। सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान करीब 37.3 इंच वर्षा होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 30 से 32 इंच के बीच रहने की संभावना जताई गई है।
यह भी पढ़ें-यूसीसी पर जमीयत का बड़ा हमला: बोले- मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल बर्दाश्त नहीं, लिव-इन रिलेशनशिप अपवित्र रिश्ता
केवल सात जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
अब तक के आंकड़ों के अनुसार भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बालाघाट, धार, खरगोन, रायसेन, सीहोर समेत 48 जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से कम बना हुआ है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले तीन दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा।
इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून
मौसम विभाग ने अलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा।
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नौ दिन की देरी से हुई एंट्री
मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य आगमन तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार यह 24 जून को पहुंचा। यानी मानसून निर्धारित समय से करीब नौ दिन देरी से आया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि वर्षा की मात्रा, नमी वाली हवाओं की दिशा और उनके प्रभाव क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटों के दौरान 75 मिमी से अधिक बारिश दर्ज होने के साथ दक्षिणी सीमावर्ती जिलों में लगातार सक्रिय मानसूनी गतिविधियां देखी गईं, जिसके बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की गई।
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बारिश का कोटा अभी भी आधा अधूरा
मानसून के देर से आने का असर शुरुआती सीजन पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में 1 जून से 24 जून तक औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर सहित 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।
इस साल कम बरसात की आशंका
भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत 47 जिलों में बारिश का स्तर औसत से नीचे रहने का अनुमान है। सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान करीब 37.3 इंच वर्षा होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 30 से 32 इंच के बीच रहने की संभावना जताई गई है।
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केवल सात जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
अब तक के आंकड़ों के अनुसार भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बालाघाट, धार, खरगोन, रायसेन, सीहोर समेत 48 जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से कम बना हुआ है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले तीन दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा।
