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MP News: राज्यसभा विवाद में कांग्रेस की फूट आई सामने, दिग्विजय-हरीश में तल्खी तो जीतू-उमंग के बीच दिखी तकरार
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 11 Jun 2026 03:38 PM IST
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सार
राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान सार्वजनिक मंचों पर दिखाई दी। दिग्विजय सिंह और हरीश चौधरी के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में असहज स्थिति बनी, जबकि धरना खत्म होने के बाद जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बीच भी जवाब देने को लेकर नोकझोंक देखने को मिली।
प्रेसवार्ता की फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद पार्टी के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है। चुनाव आयोग और भाजपा पर हमलावर कांग्रेस खुद अपने नेताओं के बीच दिखाई दिए मतभेदों को लेकर चर्चा में आ गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर धरना स्थल तक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई नोकझोंक के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखी नाराजगी
नामांकन निरस्त होने के बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कानूनी पहलुओं पर बात रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता को बोलने का संकेत दिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम को अपने तरीके से संचालित करने की बात कही। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी और फिर मीडिया से दूरी बना ली। कार्यक्रम के अंत तक कई नेताओं ने उन्हें बोलने के लिए आग्रह किया, लेकिन उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
धरना स्थल पर भी दिखा असमंजस
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं का धरना देर रात तक चला। धरना समाप्त होने के बाद जब कुछ पत्रकारों ने आगे की रणनीति को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से सवाल किया तो उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर इशारा करते हुए कहा, उमंग बताएगा, उमंग से पूछो, कहां है उमंग? इस पर उमंग सिंघार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, तू ही बता दे। हालांकि मीडिया के आग्रह के बाद उमंग सिंघार ने आगे की रणनीति और पार्टी के अगले कदमों की जानकारी साझा की। लेकिन नेताओं के बीच हुई यह बातचीत भी कैमरों में कैद हो गई और बाद में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
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यह भी पढ़ें-नटराजन मामले में SC कल करेगा सुनवाई, आज नामवापसी की आखिरी तारीख
नामांकन विवाद से बढ़ी सियासी गर्मी
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग और भाजपा पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि उसकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, जबकि भाजपा को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।
भाजपा ने साधा निशाना
कांग्रेस नेताओं के बीच हुई इन घटनाओं के वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया हैंडल्स पर वीडियो साझा कर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व संकट के आरोप लगाए जा रहे हैं। भाजपा का कहना है कि राज्यसभा चुनाव के बहाने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक हो गई है।
यह भी पढ़ें-चुनाव आयोग से फिलहाल कोई जवाब नहीं, अब सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस
चुनावी लड़ाई के साथ बढ़ी संगठन की चुनौती
राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस के लिए दोहरी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पार्टी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ नेताओं के बीच सामने आए मतभेद विपक्ष को हमले का नया मौका दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को कांग्रेस के भीतर समन्वय की कमी और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखी नाराजगी
नामांकन निरस्त होने के बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कानूनी पहलुओं पर बात रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता को बोलने का संकेत दिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम को अपने तरीके से संचालित करने की बात कही। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी और फिर मीडिया से दूरी बना ली। कार्यक्रम के अंत तक कई नेताओं ने उन्हें बोलने के लिए आग्रह किया, लेकिन उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
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धरना स्थल पर भी दिखा असमंजस
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर कांग्रेस नेताओं का धरना देर रात तक चला। धरना समाप्त होने के बाद जब कुछ पत्रकारों ने आगे की रणनीति को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से सवाल किया तो उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर इशारा करते हुए कहा, उमंग बताएगा, उमंग से पूछो, कहां है उमंग? इस पर उमंग सिंघार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, तू ही बता दे। हालांकि मीडिया के आग्रह के बाद उमंग सिंघार ने आगे की रणनीति और पार्टी के अगले कदमों की जानकारी साझा की। लेकिन नेताओं के बीच हुई यह बातचीत भी कैमरों में कैद हो गई और बाद में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
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नामांकन विवाद से बढ़ी सियासी गर्मी
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग और भाजपा पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि उसकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, जबकि भाजपा को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।
भाजपा ने साधा निशाना
कांग्रेस नेताओं के बीच हुई इन घटनाओं के वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया हैंडल्स पर वीडियो साझा कर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व संकट के आरोप लगाए जा रहे हैं। भाजपा का कहना है कि राज्यसभा चुनाव के बहाने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक हो गई है।
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चुनावी लड़ाई के साथ बढ़ी संगठन की चुनौती
राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस के लिए दोहरी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पार्टी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ नेताओं के बीच सामने आए मतभेद विपक्ष को हमले का नया मौका दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को कांग्रेस के भीतर समन्वय की कमी और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी से जोड़कर देखा जा रहा है।

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