फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Smart dustbins in Bhopal turn into scrap: Many are rusting while others lie unused; questions raised over the

भोपाल में स्मार्ट डस्टबिन बने कबाड़ः कई जंग खा रहे तो कई बेकार पड़े, साढ़े 13 करोड़ की योजना पर उठे सवाल

Sat, 04 Jul 2026 05:15 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 04 Jul 2026 05:15 PM IST
सार

भोपाल में स्मार्ट कचरा प्रबंधन के लिए करीब 13.50 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए 190 स्मार्ट डस्टबिन अब बेकार पड़े हैं। कई डस्टबिन जंग खा रहे हैं तो कई खराब हो चुके हैं। स्मार्ट सिटी का तर्क है कि बाद में शहर को डस्टबिन मुक्त बनाने की नीति लागू होने से इन्हें हटाया गया है।

विज्ञापन
Smart dustbins in Bhopal turn into scrap: Many are rusting while others lie unused; questions raised over the
स्मार्ट डस्टबिन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल को स्मार्ट बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए स्मार्ट डस्टबिन अब खुद बदहाली की तस्वीर बन गए हैं। करीब 13.50 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए 190 स्मार्ट डस्टबिन में से कई खराब हो चुके हैं, कई जंग खा रहे हैं और कई कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में करोड़ों की इस परियोजना की उपयोगिता और रखरखाव पर सवाल उठने लगे हैं।
विज्ञापन




स्मार्ट कचरा प्रबंधन के नाम पर करोड़ों की योजना
भोपाल स्मार्ट सिटी ने वर्ष 2018 में शहर में रियल टाइम कचरा संग्रहण व्यवस्था शुरू करने के लिए पहले चरण में 40 और बाद में 150 स्मार्ट डस्टबिन लगाए थे। इन डस्टबिन में सेंसर तकनीक लगाई गई थी, जो कचरा भरने पर कंट्रोल रूम को सूचना भेजती थी। इसके बाद कचरा वाहन को अलर्ट मिलना था, ताकि समय पर डस्टबिन खाली किए जा सकें।
विज्ञापन


दावा बड़ा, लेकिन जमीनी हकीकत अलग
योजना के तहत दावा किया गया था कि इससे कचरा संग्रहण व्यवस्था आधुनिक और प्रभावी बनेगी। प्रत्येक स्मार्ट डस्टबिन में करीब दो टन कचरा रखने की क्षमता भी बताई गई थी। लेकिन अब शहर के कई इलाकों में यही डस्टबिन खराब हालत में पड़े हैं। न्यू मार्केट मल्टी लेवल पार्किंग के पास समेत कई स्थानों पर डस्टबिन जंग खाते और बेकार पड़े दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि डस्टबिन उपयोग में नहीं हैं तो यह सार्वजनिक धन की बर्बादी है। खराब पड़े डस्टबिनों के रखरखाव और निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें-कांग्रेस में अनुशासन का डंडा: पार्टी विरोधी बयान देने वाले नेताओं पर एक्शन शुरू, जिलाध्यक्ष तैयार करेंगे सूची

स्मार्ट सिटी ने दी सफाई
भोपाल स्मार्ट सिटी के जनसंपर्क अधिकारी का कहना है कि कुछ डस्टबिन नहीं खरीदे गए थे। उन्होंने बताया कि बाद में केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन की गाइडलाइन के तहत शहर को डस्टबिन फ्री बनाने का निर्णय लिया गया, जिसके बाद कई स्थानों से डस्टबिन हटाए गए। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए डस्टबिनों का अब क्या उपयोग हो रहा है और वे खुले में क्यों पड़े हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डस्टबिन हटाने थे तो करोड़ों रुपये खर्च कर इन्हें लगाया क्यों गया? यदि योजना बदली तो सार्वजनिक धन से खरीदे गए उपकरणों का उचित उपयोग क्यों नहीं हुआ? अब करोड़ों की यह परियोजना सवालों के घेरे में है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed