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MP News: मध्य प्रदेश की सुनीता सिंह ने किया कमाल, 56 की उम्र में किलिमंजारो फतह कर रचा इतिहास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 17 Apr 2026 02:28 PM IST
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सार
मध्य प्रदेश की सुनीता सिंह ने 56 साल की उम्र में माउंट किलिमंजारो फतह कर इतिहास रच दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे उम्र और जिम्मेदारियां छोटी पड़ जाती हैं।
सुनीता सिंह माउंट किलिमंजारो के ऊपर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की रहने वाली सुनीता सिंह ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो को फतह कर लिया है। 56 साल की उम्र में यह कारनामा कर उन्होंने खुद को देश की सबसे उम्रदराज भारतीय महिला पर्वतारोही के रूप में स्थापित किया है। भारतीय स्टेट बैंक में सहायक महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत सुनीता सिंह ने 15 अप्रैल 2026 को 5,895 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचकर तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने अपने संस्थान का झंडा भी लहराया और देश का नाम रोशन किया।
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सुनीता सिंह ने अपनी सफलता को अनुशासन और लगातार मेहनत का परिणाम बताया। उनका कहना है कि नौकरी की व्यस्तता के बीच पर्वतारोहण की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। यह उनका पहला बड़ा अभियान नहीं है। इससे पहले भी वह यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा लहरा चुकी हैं। उन्होंने अगस्त 2025 में इस शिखर को सफलतापूर्वक फतह किया था।
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मूल रूप से जबलपुर की रहने वाली सुनीता सिंह ने अपनी पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से पूरी की है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने खुशी जताई है और इसे प्रेरणादायक बताया है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र और जिम्मेदारियां कभी भी सपनों की राह में रुकावट नहीं बनतीं।
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सुनीता सिंह ने अपनी सफलता को अनुशासन और लगातार मेहनत का परिणाम बताया। उनका कहना है कि नौकरी की व्यस्तता के बीच पर्वतारोहण की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। यह उनका पहला बड़ा अभियान नहीं है। इससे पहले भी वह यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा लहरा चुकी हैं। उन्होंने अगस्त 2025 में इस शिखर को सफलतापूर्वक फतह किया था।
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मूल रूप से जबलपुर की रहने वाली सुनीता सिंह ने अपनी पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से पूरी की है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने खुशी जताई है और इसे प्रेरणादायक बताया है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र और जिम्मेदारियां कभी भी सपनों की राह में रुकावट नहीं बनतीं।
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