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MP: कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत, एफआईआर और एसआईटी के हाईकोर्ट आदेश पर लगाई रोक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sabahat Husain Updated Tue, 10 Mar 2026 11:33 AM IST
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सार

Arif Masood: भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर और एसआईटी जांच के निर्देश दिए गए थे। 

Supreme Court Stays FIR and SIT Probe Against Congress MLA Arif Masood Bhopal News in Hindi
आरिफ मसूद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए गए थे। यह पूरा विवाद भोपाल के इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन और कथित फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा हुआ है।

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हाईकोर्ट ने दिए थे सख्त निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान भोपाल पुलिस कमिश्नर को आरिफ मसूद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही पुलिस महानिदेशक को विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाकर पूरे मामले की जांच करने के लिए कहा गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर जताई आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदूरकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार का जवाब आए बिना इस तरह का अंतरिम आदेश देना जरूरी नहीं था। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पहली नजर में हाईकोर्ट के निर्देश काफी कठोर दिखाई देते हैं।

विवेक तंखा ने रखा मसूद का पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में आरिफ मसूद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने पैरवी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने सरकार का पक्ष सुने बिना ही एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने का आदेश जारी कर दिया, जो न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से उचित नहीं है।

हाईकोर्ट में ही होगा अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें जल्द पूरी करें, जिसके बाद हाईकोर्ट इस मामले में तथ्यों और मेरिट के आधार पर अंतिम निर्णय करेगा।

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कॉलेज की मान्यता रद्द होने से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, उच्च शिक्षा विभाग ने जांच के बाद 9 जून 2025 को भोपाल के खानूगांव स्थित इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ आरिफ मसूद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। यह कॉलेज अमन एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित है, जिसमें आरिफ मसूद सचिव हैं। शिकायत के बाद हुई जांच में यह आरोप सामने आया कि कॉलेज संचालन के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एनओसी और मान्यता हासिल की गई थी।

फर्जी सेल डीड का भी आरोप
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कॉलेज की जमीन से जुड़ी सेल डीड कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तैयार कराई गई और उसे पंजीयन कार्यालय में दर्ज कराया गया। इसी शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू हुई थी।

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