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बीयू में तकनीकी क्रांति: एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स में AI-IOT की एंट्री, डिग्री के साथ मिलेगा रोजगार का रास्ता
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 01 Jun 2026 08:14 PM IST
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सार
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने तकनीकी शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स को एआई और आईओटी से जोड़ दिया है। सत्र 2026-27 से शुरू होने वाला नया पाठ्यक्रम छात्रों को आधुनिक तकनीकों, इंटर्नशिप और उद्योग आधारित प्रशिक्षण से लैस करेगा, जिससे रोजगार और स्टार्टअप की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी।
बीयू भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने बदलती तकनीकी दुनिया की जरूरतों को देखते हुए अपने इलेक्ट्रॉनिक्स पाठ्यक्रम में बड़ा और अहम बदलाव किया है। अब पारंपरिक एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स की जगह शैक्षणिक सत्र 2026-27 से एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक्स, आईओटी और एआई) कोर्स शुरू किया जाएगा। विश्वविद्यालय का दावा है कि यह बदलाव छात्रों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के साथ रोजगार और शोध के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।
पुराने सिलेबस से बाहर निकलकर भविष्य की तकनीक पर फोकस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती तकनीकों में शामिल हैं। स्मार्ट शहरों से लेकर उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और ऑटोमेशन तक इनका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई को नई तकनीकों के साथ जोड़कर छात्रों को समय के साथ कदम मिलाने का अवसर दिया है।
क्लासरूम से सीधे इंडस्ट्री तक पहुंचेगा छात्र
इलेक्ट्रॉनिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. एनके गौर के मुताबिक नया पाठ्यक्रम उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें केवल किताबों तक सीमित पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि छात्रों को प्रायोगिक प्रशिक्षण, लाइव प्रोजेक्ट और इंटर्नशिप के जरिए वास्तविक कार्य अनुभव भी दिया जाएगा। इससे पढ़ाई पूरी होते ही छात्रों की नौकरी पाने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
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यह भी पढ़ें-सीएम-पीसीसी चीफ की जुबानी जंग तेज, पटवारी ने कार्यकर्ताओं से कहा- पुतले नहीं, फूलों से करें विरोध
एआई और आईओटी के दौर में बढ़ेगी डिग्री की ताकत
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई, स्मार्ट डिवाइस, ऑटोमेशन और डेटा आधारित सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इस कोर्स से निकलने वाले विद्यार्थियों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन, अनुसंधान और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में करियर के कई नए रास्ते खुलेंगे।
यह भी पढ़ें-आपदा से निपटने कंट्रोल रूम सक्रिय, हेल्पलाइन नंबर जारी
छात्रों को मिलेगा हाईटेक अवसर
अब तक एआई और आईओटी जैसे विषयों की विशेषज्ञ पढ़ाई के लिए छात्रों को बड़े तकनीकी संस्थानों की ओर जाना पड़ता था, लेकिन बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के इस फैसले से भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक और रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह पाठ्यक्रम केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों को तकनीकी नवाचार, शोध और उद्यमिता के लिए भी तैयार करेगा। इससे युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले भी बन सकेंगे।
पुराने सिलेबस से बाहर निकलकर भविष्य की तकनीक पर फोकस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती तकनीकों में शामिल हैं। स्मार्ट शहरों से लेकर उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और ऑटोमेशन तक इनका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई को नई तकनीकों के साथ जोड़कर छात्रों को समय के साथ कदम मिलाने का अवसर दिया है।
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क्लासरूम से सीधे इंडस्ट्री तक पहुंचेगा छात्र
इलेक्ट्रॉनिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. एनके गौर के मुताबिक नया पाठ्यक्रम उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें केवल किताबों तक सीमित पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि छात्रों को प्रायोगिक प्रशिक्षण, लाइव प्रोजेक्ट और इंटर्नशिप के जरिए वास्तविक कार्य अनुभव भी दिया जाएगा। इससे पढ़ाई पूरी होते ही छात्रों की नौकरी पाने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
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एआई और आईओटी के दौर में बढ़ेगी डिग्री की ताकत
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई, स्मार्ट डिवाइस, ऑटोमेशन और डेटा आधारित सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इस कोर्स से निकलने वाले विद्यार्थियों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन, अनुसंधान और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में करियर के कई नए रास्ते खुलेंगे।
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छात्रों को मिलेगा हाईटेक अवसर
अब तक एआई और आईओटी जैसे विषयों की विशेषज्ञ पढ़ाई के लिए छात्रों को बड़े तकनीकी संस्थानों की ओर जाना पड़ता था, लेकिन बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के इस फैसले से भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक और रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह पाठ्यक्रम केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों को तकनीकी नवाचार, शोध और उद्यमिता के लिए भी तैयार करेगा। इससे युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले भी बन सकेंगे।

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