त्विषा शर्मा मौत मामला: सास गिरिबाला और पति समर्थ की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ी, CFSL रिपोर्ट का इंतजार बाकी
भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले में अदालत ने सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ा दी। सीबीआई को CFSL रिपोर्ट का इंतजार है।
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राजधानी भोपाल के हाईप्रोफाइल त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में जेल में बंद उसकी सास, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा भोपाल जिला उपभोक्ता फोरम बेंच-2 की पूर्व अध्यक्ष गिरिबाला सिंह और उनके बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह फिलहाल जेल में ही रहेंगे। सीबीआई ने दोनों को दहेज हत्या समेत विभिन्न धाराओं में दर्ज प्रकरण में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। मंगलवार, 30 जून को दोनों की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भोपाल जिला अदालत में पेश किया गया। सीबीआई की मांग पर अदालत ने गिरिबाला सिंह और त्विषा के पति समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ा दी। फिलहाल दोनों जेल में ही रहेंगे।
'पुलिस सुरक्षा में घर जाना है'
पेशी के दौरान गिरिबाला सिंह ने अदालत से कहा कि उनके बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित घर से करीब 20 लाख रुपये के जेवर चोरी हो गए हैं। उन्होंने पुलिस सुरक्षा में घर जाकर घटना स्थल देखने की अनुमति देने का अनुरोध किया। गिरिबाला सिंह ने कहा कि उनके घर से कोई दस्तावेज चोरी नहीं हुए हैं, केवल जेवर ले जाए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले गिरिबाला सिंह के घर में बदमाश घुस गए थे। जेवर और दस्तावेज लेकर भागने के दौरान पुलिस की गश्ती टीम मौके पर पहुंच गई। सायरन की आवाज सुनकर बदमाश कुछ जेवर और दस्तावेजों की फाइल छोड़कर जंगल की ओर फरार हो गए।
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सीबीआई ने अदालत को बताया कि चोरी के मामले की जांच भोपाल पुलिस कर रही है और एजेंसी को भी इसकी सूचना दे दी गई है। गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता ने मांग की कि उन्हें पुलिस सुरक्षा में घर ले जाकर यह दिखाया जाए कि आखिर क्या-क्या सामान चोरी हुआ है।
इस पर सीबीआई ने आपत्ति जताते हुए कहा कि चोरी और त्विषा की मौत, दोनों अलग-अलग मामले हैं और वर्तमान सुनवाई में चोरी के मामले को शामिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि गिरिबाला सिंह घर जाने की अनुमति चाहती हैं तो इसके लिए विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया जाए। केवल मौखिक अनुरोध के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा।
वॉयस सैंपल और लैपटॉप पासवर्ड पर 3 जुलाई को सुनवाई
मंगलवार को सीबीआई ने अदालत में दो अलग-अलग आवेदन पेश किए। पहले आवेदन में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी गई, जबकि दूसरे आवेदन में समर्थ सिंह के लैपटॉप का पासवर्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। सीबीआई ने अदालत को बताया कि त्विषा की मौत से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य समर्थ सिंह के लैपटॉप में हो सकते हैं, लेकिन पासवर्ड सुरक्षित होने के कारण उसकी जांच संभव नहीं हो पा रही है। इसलिए पासवर्ड उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।
सीबीआई ने यह भी बताया कि त्विषा के परिजनों के अधिवक्ता ने कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग अदालत और जांच एजेंसी को सौंपी हैं। परिजनों का दावा है कि इन रिकॉर्डिंग में सुनाई देने वाली महिला की आवाज गिरिबाला सिंह की है, जिसमें त्विषा के विवाह के बाद उसके साथ कथित प्रताड़ना से जुड़ी बातें हैं। इन रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच और आवाज के मिलान के लिए गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी गई है। अदालत ने वॉयस सैंपल और लैपटॉप के पासवर्ड से जुड़े दोनों आवेदनों पर सुनवाई के लिए 3 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।
क्या बोला त्विषा का भाई?
त्विषा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने कहा कि इस मामले के कई पहलू हैं। उदाहरण के लिए, पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट अलग तरीके से सामने आई थी और उसके संबंध में जवाब भी प्रस्तुत किए गए थे। दूसरे पोस्टमार्टम के दौरान भी लिगेचर (फंदे के निशान) संबंधी रिपोर्ट तुरंत प्रस्तुत नहीं की गई। हालांकि, दूसरे पोस्टमार्टम में लिगेचर से जुड़े निष्कर्ष लंबित जांच रिपोर्टों के परिणामों के साथ अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हिस्सा होंगे।
ऐसा लगता है कि दस्तावेज चोरी करने वाले चोर काफी पढ़े-लिखे रहे होंगे। आखिर दस्तावेज ही क्यों चुराए गए? किसी चोर को यह कैसे पता होगा कि उस लोहे की अलमारी में कौन-कौन से दस्तावेज रखे थे? फिर भी उन्होंने उसी लोहे की अलमारी को तोड़ दिया। इस मामले में इतनी सारी बातें हैं कि कोई भी आम व्यक्ति इस खबर को देखकर समझ जाएगा कि एक बेहद संदिग्ध कहानी गढ़ी जा रही है। आगे चलकर वे घर में चोरी की घटना भी दिखा सकते हैं। यदि सीबीआई कोई सवाल उठाती है, तो उनके पास पहले से जवाब तैयार रहेगा कि वह सामान चोरी हो गया और अब मौजूद नहीं है। हमारा अगला कदम यही है कि हम सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके। भोपाल प्रशासन से अब तक हमें कोई राहत नहीं मिली है, इसलिए हम इस मामले को दिल्ली स्थानांतरित कराने की कोशिश कर रहे हैं।"
