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नीट के बाद एक और परीक्षा रद्द: अब एमपी में वनरक्षक भर्ती परीक्षा कैंसिल, सर्वर हो गया था फेल; भड़के अभ्यर्थी

Sun, 07 Jun 2026 08:42 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 07 Jun 2026 08:42 PM IST
सार

MP: देशभर में नीट परीक्षा रद्द के बाद छात्रों का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ कि भोपाल में एमपीईएसबी की वनरक्षक भर्ती परीक्षा तकनीकी गड़बड़ी के कारण प्रभावित हो गई। दूसरी पाली की परीक्षा नहीं होने पर अभ्यर्थियों ने हंगामा किया। पढ़ें पूरी खबर

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Uproar over forest guard recruitment exam: Candidates create a ruckus after server crash; police called in; al
विरोध प्रदर्शन करते अभ्यर्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा आयोजित वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान रविवार को राजधानी स्थित मित्तल कॉलेज परीक्षा केंद्र पर जमकर हंगामा हुआ। दूसरी पाली की परीक्षा तकनीकी समस्या के कारण शुरू नहीं हो सकी, जिससे नाराज अभ्यर्थियों ने धरना देकर प्रदर्शन किया और परीक्षा प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा। बाद में MPESB ने परीक्षा स्थगित कर 20 जून को दोबारा आयोजित करने की घोषणा की।

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दूसरी पाली की परीक्षा तकनीकी कारणों से प्रभावित
वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा 4 जून से 19 जून 2026 तक आयोजित की जा रही है। रविवार को दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक दूसरी पाली की परीक्षा निर्धारित थी, लेकिन सर्वर संबंधी तकनीकी समस्या के कारण परीक्षा शुरू नहीं हो सकी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि रिपोर्टिंग के बाद उन्हें घंटों इंतजार कराया गया। बार-बार यह आश्वासन दिया गया कि तकनीकी समस्या जल्द दूर हो जाएगी, लेकिन शाम तक परीक्षा शुरू नहीं हो सकी। बाद में अधिकारियों ने सर्वर क्रैश होने की जानकारी दी।

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विरोध प्रदर्शन के बाद बुलानी पड़ी पुलिस
परीक्षा निरस्त होने से नाराज अभ्यर्थियों ने केंद्र परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अभ्यर्थी देवांशु तिवारी ने आरोप लगाया कि छात्र लगातार परीक्षा शुरू कराने और स्पष्ट जानकारी देने की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने बताया कि जब छात्र परिसर में धरने पर बैठ गए, तो कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें हटाने का प्रयास किया। विरोध बढ़ने पर पुलिस को बुलाया गया और अभ्यर्थियों को परिसर से बाहर किया गया।

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पढ़ें:  वन रक्षक एवं जेल प्रहरी परीक्षा रद्द होने से फूटा छात्रों का गुस्सा, पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट पहुंचे

दूर-दराज से पहुंचे अभ्यर्थियों में नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि कई अभ्यर्थी प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित सैकड़ों किलोमीटर दूर से परीक्षा देने भोपाल पहुंचे थे। परीक्षा नहीं होने से उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हुआ। उनका आरोप है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें घंटों तक परीक्षा केंद्र में बैठाकर रखा गया। छात्रों का कहना है कि सुबह से केंद्र पर मौजूद रहने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलीं और कई अभ्यर्थी भूखे-प्यासे परेशान होते रहे।

धांधली और पेपर लीक की आशंका
विरोध के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में धांधली और पेपर लीक होने की आशंका भी जताई। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। छात्रों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हंगामे के बीच मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने देर शाम आधिकारिक सूचना जारी कर बताया कि 7 जून को दूसरी पाली में आयोजित परीक्षा तकनीकी समस्या के कारण स्थगित की गई है।

मंडल के अनुसार, अभ्यर्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए यह परीक्षा अब 20 जून 2026 को प्रथम पाली में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थी नए प्रवेश पत्र मंडल की वेबसाइट से डाउनलोड कर परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

जवाबदेही तय करने की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय राहत देने वाला है, लेकिन तकनीकी खामी के लिए जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। छात्रों ने मांग की है कि भविष्य में भर्ती परीक्षाओं में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाए।

दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल, छात्रों को मुआवजा देने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भर्ती परीक्षा स्थगित होने के मामले में सरकार और परीक्षा एजेंसी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण हजारों अभ्यर्थियों को मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि परीक्षा संचालन का कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से एप्टेक कंपनी को सौंपा गया है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई, इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी मांग की कि जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा तकनीकी कारणों से स्थगित हुई है, उन्हें यात्रा, भोजन तथा अन्य खर्चों की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाए। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाएं युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं और ऐसी अव्यवस्थाओं से भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

दिग्विजय सिंह की दो प्रमुख मांगें

  1. परीक्षा संचालन में हुई गड़बड़ी तथा एजेंसी चयन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  2. प्रभावित अभ्यर्थियों को आने-जाने, भोजन और अन्य खर्चों का मुआवजा दिया जाए।
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