सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   World Environment Day Special: Bhopal—The City of Lakes—Heads Towards an Environmental Crisis; Here Are the 5

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: झीलों का शहर भोपाल पर्यावरणीय संकट की ओर, बिगड़ते पर्यावरण के ये 5 सबसे बड़े कारण

न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 05 Jun 2026 08:02 AM IST
विज्ञापन
सार

विश्व पर्यावरण दिवस पर भोपाल के सामने पांच बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियां साफ दिखाई देती हैं। झीलों का प्रदूषण, वेटलैंड्स पर अतिक्रमण, कचरा प्रबंधन की समस्या, बढ़ता वायु प्रदूषण और घटता हरित क्षेत्र। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो झीलों का शहर कहलाने वाला भोपाल आने वाले वर्षों में गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर सकता है।

World Environment Day Special: Bhopal—The City of Lakes—Heads Towards an Environmental Crisis; Here Are the 5
भोपाल में फैली गंदगी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

कभी हरियाली, झीलों और स्वच्छ वातावरण के लिए देशभर में पहचान रखने वाला भोपाल अब धीरे-धीरे पर्यावरणीय चुनौतियों के जाल में फंसता जा रहा है। बढ़ता शहरीकरण, झीलों पर बढ़ता दबाव, अतिक्रमण, कचरा प्रबंधन की खामियां और घटते हरित क्षेत्र शहर के पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण विद् कहते हैं कि शहर की मौजूदा स्थिति का आकलन बताता है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में भोपाल को जल, वायु और जैव विविधता से जुड़े गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

झीलों में बढ़ता प्रदूषण, पानी की गुणवत्ता पर खतरा
भोपाल की पहचान उसकी झीलों से है, लेकिन यही झीलें अब प्रदूषण की मार झेल रही हैं। बड़ा तालाब, छोटा तालाब और शाहपुरा झील सहित कई जलाशयों में सीवेज और मानव अपशिष्ट का दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई स्थानों पर पानी की गुणवत्ता इस स्तर तक प्रभावित हो चुकी है कि बिना शोधन के उसका उपयोग सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
Trending Videos


कैचमेंट और वेटलैंड क्षेत्रों पर बढ़ता अतिक्रमण
भोपाल के जल स्रोतों और वेटलैंड क्षेत्रों पर बढ़ते अतिक्रमण को पर्यावरणविद सबसे बड़ा खतरा मान रहे हैं। झीलों के कैचमेंट क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों और अवैध कब्जों के कारण प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है। इससे झीलों की जल संग्रहण क्षमता घट रही है और भविष्य में जल संकट की आशंका बढ़ रही है।

कचरा प्रबंधन बना बड़ी चुनौती
शहर में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है। आदमपुर डंपिंग साइट पर वर्षों से जमा कचरे का निस्तारण अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मिट्टी, भूजल और वायु तीनों प्रभावित हो रहे हैं। कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से पर्यावरणीय जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

वाहनों और निर्माण गतिविधियों से बढ़ रहा वायु प्रदूषण
भोपाल में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, खुले में कचरा जलाने और अन्य गतिविधियों के कारण वायु प्रदूषण में वृद्धि दर्ज की जा रही है। सर्दियों के मौसम में कई बार वायु गुणवत्ता सूचकांक चिंताजनक स्तर तक पहुंच जाता है।

घटते हरित क्षेत्र से जैव विविधता पर खतरा
शहर के आसपास मौजूद वन क्षेत्र और हरित पट्टियां भोपाल के पर्यावरणीय संतुलन की रीढ़ मानी जाती हैं। लेकिन तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और निर्माण गतिविधियों के कारण इन क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जैव विविधता प्रभावित होने के साथ भूजल पुनर्भरण और तापमान नियंत्रण की प्राकृतिक व्यवस्था भी कमजोर हो रही है।

माइक्रोप्लास्टिक बना नई चिंता
हाल के अध्ययनों में भोपाल की झीलों में माइक्रोप्लास्टिक कणों की मौजूदगी सामने आई है। यह न केवल जलीय जीवों बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्लास्टिक कचरे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

यह भी पढ़ें- पानी का संकट चौथे दिन भी बरकरार, VIP इलाकों में पहुंचे टैंकर, जनता परेशान


क्या कहते हैं पर्यावरणविद
भोपाल के वरिष्ठ पर्यावरणविद सुभाष सी. पांडे का कहना है कि शहर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे सबसे बड़ा कारण लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता का अभाव है। उन्होंने कहा कि लोग अभी भी यह समझने को तैयार नहीं हैं कि अनियंत्रित कचरा फैलाना, जल स्रोतों को प्रदूषित करना और अतिक्रमण जैसी गतिविधियां भविष्य के लिए कितनी घातक साबित हो सकती हैं। पांडे के अनुसार दूसरी बड़ी वजह प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में लगातार मामले उठने और शिकायतें दर्ज होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि भोपाल में तालाबों और जल स्रोतों पर अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है, वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है और कचरा निस्तारण की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। यदि इन मुद्दों पर सख्ती से काम नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में भोपाल की पर्यावरणीय स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

यह भी पढ़ें-MP कांग्रेस जिला स्तर पर करेगी बड़ा बदलाव, पीसीसी चीफ ने जिला प्रभारियों से 25 दिसंबर तक मांगी रिपोर्ट

पर्यावरण बचाने के लिए जरूरी हैं ठोस कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि झीलों के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने, ठोस कचरा प्रबंधन को मजबूत करने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन कराने की दिशा में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। इसके साथ ही नागरिकों की भागीदारी और जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed