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पॉक्सो केस की एफआईआर के बाद युवा आईपीएस पर गिरी गाज: आधी रात आदेश जारी कर एसीपी मनीष भारद्वाज पीएचक्यू अटैच
Sun, 31 May 2026 08:10 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 31 May 2026 08:10 PM IST
सार
भोपाल में एक रसूखदार व्यक्ति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने के बाद एमपी नगर एसीपी मनीष भारद्वाज को अचानक पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया गया। इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे और प्रशासनिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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एसीपी मनीष भारद्वाज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल में एक रसूखदार व्यक्ति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कराने की कार्रवाई एक युवा आईपीएस अधिकारी को भारी पड़ गई। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 2023 बैच के अधिकारी एवं एमपी नगर एसीपी मनीष भारद्वाज को राज्य शासन ने अचानक पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) अटैच कर दिया। मंत्रालय से यह आदेश शनिवार देर रात सरकारी अवकाश के दिन जारी किया गया, जिससे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार पूरा मामला एक नाबालिग से कथित छेड़छाड़ से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष राजस्थान का निवासी बताया जा रहा है। घटना से संबंधित शिकायत पहले राजस्थान पुलिस को दी गई थी। राजस्थान पुलिस ने नियमानुसार जीरो एफआईआर दर्ज कर प्रकरण को भोपाल पुलिस के पास भेजा था। बताया जाता है कि मामला पहले हबीबगंज थाने पहुंचा, लेकिन क्षेत्राधिकार एमपी नगर थाना क्षेत्र का बताते हुए इसे वहां स्थानांतरित कर दिया गया।
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प्रभावशाली उद्योगपति के खिलाप एफआईआर दर्ज
प्रकरण जब एसीपी एमपी नगर मनीष भारद्वाज के समक्ष पहुंचा तो उन्होंने दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर थाना पुलिस को जेजे एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। एसीपी के लिखित आदेश के बाद एमपी नगर थाने में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी कार्रवाई के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक, प्रशासनिक और मीडिया जगत में हलचल पैदा कर दी।
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पुलिस सूत्रों का दावा है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, वह प्रभावशाली और रसूखदार माना जाता है। यही कारण है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद विभिन्न स्तरों पर दबाव और चर्चाएं शुरू हो गईं। बताया जाता है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित थाना प्रभारी ने भी खुद को इससे दूर रखा और अवकाश पर चले गए थे।
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एसीपी भारद्वाज पुलिस मुख्यालय अटैच करने आदेश जारी
इधर, एफआईआर दर्ज होने के महज एक दिन बाद ही राज्य शासन ने एसीपी मनीष भारद्वाज को पुलिस मुख्यालय अटैच करने का आदेश जारी कर दिया। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश पर गृह विभाग की सचिव कृष्णावेणी देशावतु के हस्ताक्षर हैं। आदेश के समय और परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह निर्णय अवकाश के दिन देर रात लिया गया। सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई से आईपीएस अधिकारियों के बीच असंतोष का माहौल है। चर्चा यह भी है कि प्रकरण दर्ज करने के पीछे कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक निर्देश थे, लेकिन मामला सुर्खियों में आने और विवाद बढ़ने के बाद पूरा दायित्व एसीपी पर डाल दिया गया। हालांकि इस संबंध में किसी वरिष्ठ अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल एसीपी मनीष भारद्वाज को पीएचक्यू अटैच किए जाने के पीछे के वास्तविक कारणों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। प्रशासनिक गलियारों में यह मामला कानून के निष्पक्ष पालन, पुलिस अधिकारियों की कार्यस्वतंत्रता और प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में होने वाले दबावों को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और पुलिस मुख्यालय आगे इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाते हैं।
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प्रभावशाली उद्योगपति के खिलाप एफआईआर दर्ज
प्रकरण जब एसीपी एमपी नगर मनीष भारद्वाज के समक्ष पहुंचा तो उन्होंने दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर थाना पुलिस को जेजे एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। एसीपी के लिखित आदेश के बाद एमपी नगर थाने में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी कार्रवाई के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक, प्रशासनिक और मीडिया जगत में हलचल पैदा कर दी।
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पुलिस सूत्रों का दावा है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, वह प्रभावशाली और रसूखदार माना जाता है। यही कारण है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद विभिन्न स्तरों पर दबाव और चर्चाएं शुरू हो गईं। बताया जाता है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित थाना प्रभारी ने भी खुद को इससे दूर रखा और अवकाश पर चले गए थे।
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एसीपी भारद्वाज पुलिस मुख्यालय अटैच करने आदेश जारी
इधर, एफआईआर दर्ज होने के महज एक दिन बाद ही राज्य शासन ने एसीपी मनीष भारद्वाज को पुलिस मुख्यालय अटैच करने का आदेश जारी कर दिया। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश पर गृह विभाग की सचिव कृष्णावेणी देशावतु के हस्ताक्षर हैं। आदेश के समय और परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह निर्णय अवकाश के दिन देर रात लिया गया। सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई से आईपीएस अधिकारियों के बीच असंतोष का माहौल है। चर्चा यह भी है कि प्रकरण दर्ज करने के पीछे कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक निर्देश थे, लेकिन मामला सुर्खियों में आने और विवाद बढ़ने के बाद पूरा दायित्व एसीपी पर डाल दिया गया। हालांकि इस संबंध में किसी वरिष्ठ अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल एसीपी मनीष भारद्वाज को पीएचक्यू अटैच किए जाने के पीछे के वास्तविक कारणों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। प्रशासनिक गलियारों में यह मामला कानून के निष्पक्ष पालन, पुलिस अधिकारियों की कार्यस्वतंत्रता और प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में होने वाले दबावों को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और पुलिस मुख्यालय आगे इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाते हैं।
