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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Burhanpur News ›   “Unseasonal Rain Wreaks Havoc in Burhanpur, Laborers and Farmers Suffer Heavy Losses”

बेमौसम बारिश का कहर: बुरहानपुर में मजदूर-किसानों की कमर टूटी, हजारों ईंटें गलकर हुईं खराब; लाखों का नुकसान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर Published by: बुरहानपुर ब्यूरो Updated Fri, 03 Apr 2026 03:58 PM IST
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सार

बुरहानपुर में बेमौसम बारिश और आंधी से ईंट भट्टों की कच्ची ईंटें नष्ट हो गईं, जिससे मजदूरों को भारी नुकसान हुआ। फसलें भी प्रभावित हुईं, किसानों की चिंता बढ़ी। मजदूर-किसान आर्थिक संकट में हैं और प्रशासन से राहत की उम्मीद कर रहे हैं। 

“Unseasonal Rain Wreaks Havoc in Burhanpur, Laborers and Farmers Suffer Heavy Losses”
बुरहानपुर में बेमौसम बारिश - फोटो : amar ujala
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विस्तार

बुरहानपुर में बेमौसम बारिश ने एक बार फिर मेहनतकश मजदूरों और किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जिले में अचानक बदले मौसम ने राहत के बजाय तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। तेज आंधी और बारिश ने ईंट भट्टों पर तैयार हो रही कच्ची ईंटों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। जिन ईंटों को बनाने में मजदूरों ने दिन-रात पसीना बहाया, वो एक ही बारिश में मिट्टी में मिल गईं।

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सबसे ज्यादा मार पड़ी है प्रजापति समाज के उन मजदूर परिवारों पर, जो रोज सुबह 3 बजे उठकर कड़ी मेहनत से ईंट तैयार करते हैं। ईंटों को धूप में सुखाने के लिए रखा गया था, लेकिन अचानक आई बारिश ने हजारों ईंटों को गलाकर बेकार कर दिया। हालात ये हैं कि भट्टों पर जगह-जगह टूटी और बिखरी ईंटें नजर आ रही हैं… और मजदूरों की आंखों में बेबसी साफ झलक रही है।
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पीड़ित मजदूर किरण प्रजापति का कहना है कि हम रोज सुबह 3 बजे उठकर मेहनत करते हैं, लेकिन इस बारिश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। हजारों ईंट खराब हो गईं।लाखों का नुकसान हो गया। अब समझ नहीं आ रहा क्या करें। सिर्फ ईंट भट्टे ही नहीं, बल्कि खेतों में खड़ी फसलें भी इस बेमौसम बारिश की चपेट में आ गई हैं। किसानों की उम्मीदें भीग चुकी हैं और उनके सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

मजदूर और किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं, मानो भगवान से ही मदद की गुहार लगा रहे हों। बेमौसम बारिश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रकृति के आगे इंसान कितना बेबस है। अब बड़ा सवाल ये है कि प्रशासन और सरकार इन पीड़ित मजदूरों और किसानों की मदद के लिए क्या ठोस कदम उठाएगी या फिर ये मेहनतकश यूं ही नुकसान झेलते रहेंगे?

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