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Chhindwara News: कोल्ड्रिफ कांड में बड़ा मोड़, 271 दिन बाद मुख्य आरोपी ज्योति सोनी को मिली जमानत
Sat, 01 Aug 2026 01:04 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:04 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित कोल्ड्रिफ जहरीली कफ सिरप कांड में मुख्य आरोपी और 'अपना मेडिकल स्टोर' की संचालिका ज्योति सोनी को करीब 271 दिन जेल में रहने के बाद अदालत से जमानत मिल गई। एसआईटी ने उन्हें 3 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया था। पढ़ें पूरी खबर
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ज्योति सोनी।
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विस्तार
मध्य प्रदेश को झकझोर देने वाले बहुचर्चित कोल्ड्रिफ जहरीली कफ सिरप कांड में शुक्रवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। मामले की मुख्य आरोपियों में शामिल 'अपना मेडिकल स्टोर' की संचालिका ज्योति सोनी को करीब 271 दिन जेल में रहने के बाद न्यायालय से जमानत मिल गई। 31 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
यह वही, मामला है जिसने वर्ष 2025 में पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर दिया था। छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में कथित रूप से जहरीली कफ सिरप पीने के बाद कई मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों के आक्रोश, जनप्रतिनिधियों के विरोध और प्रदेशभर में उठे सवालों के बीच सरकार ने तत्काल विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कराई थी।
लंबे समय तक फरार रहने के बाद हुई थी गिरफ्तारी
जांच एजेंसी के अनुसार, घटना सामने आने के बाद कई आरोपियों की तलाश शुरू की गई थी। इसी दौरान 'अपना मेडिकल स्टोर' की प्रोपराइटर ज्योति सोनी लंबे समय तक जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहीं। एसआईटी ने लगातार दबिश और तकनीकी जांच के बाद 3 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। तब से वह जेल में बंद थीं। लगभग नौ महीने बाद अब उन्हें अदालत से जमानत मिल गई है।
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क्या हैं आरोप?
एसआईटी की जांच में ज्योति सोनी पर आरोप है कि उनके मेडिकल स्टोर के माध्यम से प्रतिबंधित एवं कथित रूप से जहरीली ColdRif कफ सिरप की बिक्री की गई। जांच एजेंसी ने उन पर साक्ष्यों को प्रभावित करने, जांच में बाधा डालने और मामले से जुड़े तथ्यों में हस्तक्षेप करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। यही कारण था कि उन्हें मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया।
इस पूरे प्रकरण में उनके पति डॉ. प्रवीण सोनी सहित दवा निर्माण, सप्लाई और वितरण श्रृंखला से जुड़े कई अन्य लोगों के खिलाफ भी अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई की गई थी। एसआईटी ने जांच के दौरान दवा निर्माण, सप्लाई चैन, मेडिकल स्टोरों और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल की थी।
मासूम बच्चों की मौत से मचा था हड़कंप
परासिया में कथित रूप से जहरीली कफ सिरप पीने के बाद कई मासूम बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग, औषधि प्रशासन और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। विपक्ष ने भी सरकार को घेरा था, जबकि पीड़ित परिवारों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित कर जांच अपने हाथ में ली थी।
जांच में कई बड़े खुलासे
एसआईटी ने जांच के दौरान दवा की खरीद-बिक्री, सप्लाई नेटवर्क, मेडिकल स्टोरों के रिकॉर्ड, निर्माण कंपनी और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की। मामले में कई गिरफ्तारियां हुईं और बड़ी संख्या में दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य जब्त किए गए। जांच एजेंसी ने अदालत में विस्तृत चालान भी प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर मामले की सुनवाई जारी है।
'जमानत, बरी होना नहीं'
कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत द्वारा जमानत दिया जाना किसी आरोपी के दोषमुक्त होने का प्रमाण नहीं होता। जमानत का अर्थ केवल यह है कि आरोपी को निर्धारित शर्तों के साथ मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई है। मामले की सुनवाई जारी रहेगी और अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनाया जाएगा।
ये भी पढ़ें- एमपी: छतरपुर में दिनदहाड़े खेत से रेत निकालने के विवाद में चली गोलियां, सात लोग घायल; गांव में तनाव का माहौल
अब सभी की नजर ट्रायल पर
कफ सिरप कांड मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में शामिल है। इस मामले में अब तक कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और न्यायिक प्रक्रिया लगातार जारी है। ज्योति सोनी को जमानत मिलने के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर अदालत में चल रहे ट्रायल और अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
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यह वही, मामला है जिसने वर्ष 2025 में पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर दिया था। छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में कथित रूप से जहरीली कफ सिरप पीने के बाद कई मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों के आक्रोश, जनप्रतिनिधियों के विरोध और प्रदेशभर में उठे सवालों के बीच सरकार ने तत्काल विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कराई थी।
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लंबे समय तक फरार रहने के बाद हुई थी गिरफ्तारी
जांच एजेंसी के अनुसार, घटना सामने आने के बाद कई आरोपियों की तलाश शुरू की गई थी। इसी दौरान 'अपना मेडिकल स्टोर' की प्रोपराइटर ज्योति सोनी लंबे समय तक जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहीं। एसआईटी ने लगातार दबिश और तकनीकी जांच के बाद 3 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। तब से वह जेल में बंद थीं। लगभग नौ महीने बाद अब उन्हें अदालत से जमानत मिल गई है।
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क्या हैं आरोप?
एसआईटी की जांच में ज्योति सोनी पर आरोप है कि उनके मेडिकल स्टोर के माध्यम से प्रतिबंधित एवं कथित रूप से जहरीली ColdRif कफ सिरप की बिक्री की गई। जांच एजेंसी ने उन पर साक्ष्यों को प्रभावित करने, जांच में बाधा डालने और मामले से जुड़े तथ्यों में हस्तक्षेप करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। यही कारण था कि उन्हें मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया।
इस पूरे प्रकरण में उनके पति डॉ. प्रवीण सोनी सहित दवा निर्माण, सप्लाई और वितरण श्रृंखला से जुड़े कई अन्य लोगों के खिलाफ भी अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई की गई थी। एसआईटी ने जांच के दौरान दवा निर्माण, सप्लाई चैन, मेडिकल स्टोरों और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल की थी।
मासूम बच्चों की मौत से मचा था हड़कंप
परासिया में कथित रूप से जहरीली कफ सिरप पीने के बाद कई मासूम बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग, औषधि प्रशासन और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। विपक्ष ने भी सरकार को घेरा था, जबकि पीड़ित परिवारों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित कर जांच अपने हाथ में ली थी।
जांच में कई बड़े खुलासे
एसआईटी ने जांच के दौरान दवा की खरीद-बिक्री, सप्लाई नेटवर्क, मेडिकल स्टोरों के रिकॉर्ड, निर्माण कंपनी और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की। मामले में कई गिरफ्तारियां हुईं और बड़ी संख्या में दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य जब्त किए गए। जांच एजेंसी ने अदालत में विस्तृत चालान भी प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर मामले की सुनवाई जारी है।
'जमानत, बरी होना नहीं'
कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत द्वारा जमानत दिया जाना किसी आरोपी के दोषमुक्त होने का प्रमाण नहीं होता। जमानत का अर्थ केवल यह है कि आरोपी को निर्धारित शर्तों के साथ मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई है। मामले की सुनवाई जारी रहेगी और अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनाया जाएगा।
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अब सभी की नजर ट्रायल पर
कफ सिरप कांड मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में शामिल है। इस मामले में अब तक कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और न्यायिक प्रक्रिया लगातार जारी है। ज्योति सोनी को जमानत मिलने के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर अदालत में चल रहे ट्रायल और अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
