MP News: हीरे की धोखाधड़ी से शुरू हुआ न्याय का महाआंदोलन! लाठीचार्ज के खिलाफ नेहरू स्टेडियम में उमड़ा जनसैलाब
पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में करणी सेना परिवार का जन क्रांति न्याय आंदोलन हरदा के नेहरू स्टेडियम में व्यापक रूप ले चुका है। सर्व समाज की भारी मौजूदगी से स्टेडियम खचाखच भरा रहा। 21 सूत्रीय मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है, प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
विस्तार
करणी सेना परिवार की ओर से आयोजित जन क्रांति न्याय आंदोलन ने व्यापक रूप धारण कर लिया है। पुलिस लाठीचार्ज के विरोध की आग बढ़ती जा रही है। हरदा जिले के नेहरू स्टेडियम में भारी संख्या में लोगों का जनसैलाब देखने को मिल रहा है। चारों तरफ लोगों की मौजूदगी से पूरा नेहरू स्टेडियम खचाखच भरा हुआ है। घटना के विरोध में सर्व समाज के लोग एकजुट होकर यहां पहुंचे हैं। आंदोलन में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हैं।
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यहां से शुरू हुआ विवाद
इस आंदोलन की तैयारी पिछले तीन महीनों से जारी है। करणी सेना आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए गांव-गांव जाकर जन जागरण अभियान चला रखा है। दरअसल विवाद की वजह है एक हीरा है। राजपूत समाज के एक युवक ने एक व्यापारी से हीरे का सौदा किया था, लेकिन व्यापारी ने हीरे की खरीद में धोखाधड़ी की। आरोप है कि व्यापारी ने युवक को असली हीरे के बदले नकली हीरा थमा दिया था। थाने में शिकायत की गई मगर कार्रवाई नहीं हुई तो करणी सेना सक्रिय हुई। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव किया गया। इस विरोध के दौरान पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठियां बरसा दीं। करणी सेना के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर पर भी लाठीचार्ज किया गया। उन्हें एक दिन के लिए जेल बंद किया गया। इसके बाद से 21 दिसंबर को हरदा में बड़े आंदोलन की तैयारी की गई।
पहली बार हरदा में इतनी बड़ी भीड़
करणी सेना के इस आंदोलन में मध्य प्रदेश के लगभग सभी जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी लोग पहुंचे हैं। आयोजकों के अनुसार, करीब 50 हजार से अधिक लोग नेहरू स्टेडियम में मौजूद हैं। हालात यह रहे कि स्टेडियम में लोगों को बैठने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। हरदा में यह पहला मौका है जब किसी आंदोलन में इतनी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए हैं।
करणी सेना प्रमुख भूख हड़ताल पर
करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर 21 सूत्रीय मांगों को लेकर 14 दिसंबर से भूख हड़ताल पर हैं। आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठने वालों की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि जिला प्रशासन ने आंदोलन के लिए केवल एक दिन की अनुमति दी है, लेकिन जीवन सिंह शेरपुर का कहना है कि
“जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मानती, आंदोलन जारी रहेगा।” अब प्रशासन आगे क्या कदम उठाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
लाठीचार्ज की घटना से उपजा आक्रोश
मामले की शुरुआत एक राजपूत युवक द्वारा हीरा खरीदे जाने से हुई थी। आरोप है कि व्यापारी ने असली हीरे की जगह नकली हीरा थमा दिया। युवक ने थाने में शिकायत भी की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से नाराज करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने 12 और 13 जुलाई को थाने का घेराव किया। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर भी घायल हुए थे। तभी से समाज में भारी आक्रोश बना हुआ है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जन क्रांति आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे शहर में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने 5 स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया है। प्रदर्शन स्थल से लेकर जिले के सभी प्रवेश और निकास मार्गों पर पुलिस बल तैनात है। एक दिन पहले पुलिस ने फ्लैग मार्च भी निकाला, जिसमें 3 जिलों की पुलिस और 10 कंपनियां शामिल रहीं।
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