दतिया में दिल दहला देने वाली घटना: अस्पताल में तड़पती रही नवजात बच्ची, मां-बाप गायब; डॉक्टर्स बने सहारा
दतिया जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती दो सप्ताह की नवजात बच्ची पिछले पांच दिनों से जिंदगी की जंग लड़ रही है। हैरानी की बात है कि भर्ती कराने के बाद उसके माता-पिता उसे देखने तक नहीं लौटे, पुलिस को सूचना दी गई है।
विस्तार
दतिया जिला अस्पताल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवता और पारिवारिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) वार्ड में भर्ती करीब दो सप्ताह की एक मासूम बच्ची पिछले पांच दिनों से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के भरोसे जिंदगी और मौत से जूझ रही है। हैरानी की बात यह है कि बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उसके माता-पिता उसे देखने तक नहीं लौटे।
जानकारी के अनुसार बच्ची का जन्म 24 फरवरी को हुआ था। जन्म के कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई। इसके बाद 4 मार्च को उसके पिता आशीष और मां संध्या बच्ची को लेकर दतिया जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए उसे तुरंत एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कर लिया। लेकिन बच्ची को भर्ती कराने के बाद उसके माता-पिता अस्पताल स्टाफ को बिना कोई सूचना दिए वहां से चले गए।
para_count-1अस्पताल सूत्रों के मुताबिक उस दिन के बाद से अब तक बच्ची को देखने के लिए न तो उसके माता-पिता और न ही परिवार का कोई अन्य सदस्य अस्पताल पहुंचा है। बच्ची की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज लगातार डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है।
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जब कई दिन बीत जाने के बाद भी बच्ची के परिजन अस्पताल नहीं पहुंचे तो अस्पताल प्रबंधन ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की। अस्पताल स्टाफ ने माता-पिता के दिए गए मोबाइल नंबरों पर कई बार फोन लगाए, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को भी दे दी है, ताकि बच्ची के परिजनों का पता लगाया जा सके।
para_count-4 para_count-5 para_count-5 para_count-5दतिया जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आर.के. राठौर ने बताया कि बच्ची को गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था, जिसके बाद उसे तुरंत एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि बच्ची के माता-पिता उसे भर्ती कराने के बाद से अस्पताल नहीं लौटे हैं। अस्पताल प्रबंधन ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है और इस संबंध में पुलिस को भी सूचना दे दी गई है।
para_count-5 para_count-6 para_count-6 para_count-6वहीं सामाजिक कार्यकर्ता भानु तिवारी का कहना है कि समाज में आज भी बेटा और बेटी को लेकर भेदभाव की मानसिकता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कई मामलों में देखा जाता है कि बेटा होने पर परिवार इलाज के लिए हर संभव प्रयास करता है, लेकिन बेटी होने पर लापरवाही बरती जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से समाज की सोच पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। लड़की सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि दो परिवारों की जिम्मेदारी और सम्मान होती है।
para_count-6 para_count-7 para_count-7 para_count-7फिलहाल मासूम बच्ची अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की देखरेख में इलाज करा रही है। डॉक्टरों की टीम उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए है। जिस बच्ची को इस समय अपने माता-पिता की ममता और देखभाल की जरूरत है, वह अस्पताल के स्टाफ के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रही है।
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