Guna: फसल के कम दाम पर भड़के किसान, नानाखेड़ी मंडी में चक्काजाम, धक्का-मुक्की की बात पर विधायक शाक्य हुए नाराज
गुना की नानाखेड़ी मंडी में फसल के कम दाम से नाराज किसानों ने चक्काजाम किया। पुलिस पर मारपीट के आरोप लगे। विधायक पन्नालाल शाक्य ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और सुविधाएं सुधारने की मांग की है।
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गुना की नानाखेड़ी मंडी में सोमवार को हुए चक्काजाम और किसानों के साथ कथित मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर विधायक पन्नालाल शाक्य ने कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर को पत्र लिखकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने मंडी में किसानों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी गंभीर चिंता जताई है।
दरअसल, लगातार तीन दिनों तक मंडी बंद रहने के कारण सोमवार को बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने नानाखेड़ी मंडी पहुंचे। भारी भीड़ के चलते गेहूं से भरी ट्रॉलियों को मंडी परिसर के बाहर दशहरा मैदान और बीज निगम परिसर में खड़ा करना पड़ा। किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा, लेकिन जैसे ही बोली प्रक्रिया शुरू हुई, कई किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी उपज के दाम उम्मीद से काफी कम लगाए जा रहे हैं।
इसी से नाराज होकर किसानों ने मंडी गेट पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना था कि उन्हें उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल रहा और उनकी लगातार अनदेखी की जा रही है। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस बल मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया।
हालांकि, स्थिति उस समय बिगड़ गई जब पुलिस ने प्रदर्शन खत्म कराने के लिए सख्ती दिखाई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने किसानों को हटाने के दौरान धक्का-मुक्की की और कुछ किसानों के साथ मारपीट भी की। इतना ही नहीं, दो किसानों को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। इस कार्रवाई से मौके पर मौजूद किसानों में आक्रोश और बढ़ गया।
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घटना की जानकारी मिलते ही विधायक पन्नालाल शाक्य ने इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को पत्र लिखा। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि अन्नदाता किसानों के साथ इस प्रकार का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारें किसानों के हित में लगातार प्रयास कर रही हैं, ऐसे में प्रशासन का यह रवैया चिंताजनक है।
विधायक ने मांग की है कि घटना में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके अलावा उन्होंने मंडी में किसानों के लिए पेयजल, छाया और ठहरने जैसी मूलभूत सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया है, खासकर भीषण गर्मी के इस दौर में। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर अन्नदाता किसानों को अपनी ही उपज के उचित मूल्य के लिए सड़कों पर उतरकर संघर्ष क्यों करना पड़ता है। अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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