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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore News: AIIMS has not yet started Anika's treatment; Court directs submission of a response by July 23.

Indore News:अनिका का एम्स ने शुरू नहीं किया इलाज, 23 जुलाई को जवाब प्रस्तुत करने के लिए कोर्ट ने कहा

Fri, 17 Jul 2026 05:54 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Fri, 17 Jul 2026 05:54 PM IST
सार

स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी) टाइप-2 से पीड़ित तीन वर्षीय अनिका शर्मा के इलाज में हो रही देरी पर  हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एम्स, नई दिल्ली द्वारा लगातार जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने 23 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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Indore News: AIIMS has not yet started Anika's treatment; Court directs submission of a response by July 23.
इंदौर हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय अनिका शर्मा के इलाज में हो रही देरी पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एम्स, नई दिल्ली की ओर से एक बार फिर जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर याचिकाकर्ता ने समय दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि उपचार के लिए काफ़ी धनराशि जुटाई जा चुकी है। अब सिर्फ़ एक से डेढ़ करोड़ रुपये की आवश्यकता है, इसके बावजूद इलाज शुरू नहीं किया जा रहा।

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न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने मामले में निर्देश दिए कि एम्स 23 जुलाई तक अपना जवाब प्रस्तुत करे। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को तय की है।अनिका की ओर से एडवोकेट चंचल गुप्ता और एडवोकेट लखन शर्मा ने याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया है कि तीन वर्षीय अनिका के इलाज के लिए लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये की आवश्यकता है। परिजन केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 50 लाख रुपये सहित करीब साढ़े सात करोड़ रुपये विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग और क्राउडफंडिंग के माध्यम से जुटा चुके हैं, लेकिन उपचार अब तक शुरू नहीं हो सका है।

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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि इलाज के लिए अब कम राशि की आवश्यकता है। इसके बावजूद एम्स द्वारा उपचार प्रारंभ नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर दिन की देरी बच्ची के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बढ़ा रही है।

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परिजनों के अनुसार, एम्स ने उन्हें बताया है कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 50 लाख रुपये की राशि की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध कराने वाली कंपनी से इनवॉइस मंगाया जाएगा। दूसरी ओर, जिन सामाजिक संगठनों ने क्राउडफंडिंग के माध्यम से राशि एकत्रित की है, वे इनवॉइस के अभाव में अपनी राशि जारी नहीं कर पा रहे हैं। इससे ऐसी स्थिति बन गई है कि सरकारी सहायता और समाज के सहयोग से जुटाई गई राशि, दोनों ही उपयोग में नहीं आ पा रही हैं, जबकि बच्ची के जीवन का प्रत्येक दिन बेहद महत्वपूर्ण है।


 

इस मामले में पूर्व की सुनवाइयों के दौरान भी हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और एम्स को आवश्यक निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक एम्स की ओर से विस्तृत जवाब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।

 

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