जौहर यूनिवर्सिटी के समर्थन में मौलाना: 'आजम की गलती की सजा विश्वविद्यालय को न दें', बुलडोजर की जगह करें ये काम
मौलाना बरेलवी ने कहा कि आजम खां ने जो कुछ गलतियां कीं, उसकी सजा वो जेल मे भुगत रहे हैं। मगर जौहर विश्वविद्यालय एक शिक्षक संस्थान है, उसमें हजारों बच्चे पढ़ाई लिखाई का काम करते हैं, ये वो बच्चे हैं जिनमें ज्यादातर तादाद गरीब व कमजोर परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
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समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां द्वारा स्थापित किए गए जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर चलाए जाने की चर्चा हर तरफ हो रही है। इसी से संबंधित ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने जौहर विश्वविद्यालय के समर्थन मे प्रेस को जारी किए गए बयान मे कहा कि जौहर विश्वविद्यालय रामपुर एक ऐसी शख्सियत के नाम पर बना हुआ है जिसने देश की आजादी मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भाषण देते-देते फट गई थी मौलाना मुहम्मद अली जौहर की सिर की नस
मौलाना मुहम्मद अली जौहर ने जिंदगी भर देश के लिए मर मिटना सिखाया, गोल मेज कॉन्फ्रेंस लंदन मे भारत की आजादी के लिए मुसलसल 24 घंटा भाषण देने की वजह से, दिमाग की नस फट गई, और वही लंदन मे शहीद हो गए। उन्होंने गोल मेज कॉन्फ्रेंस में अपने भाषणों के जरिए पूरे ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया था। मौलाना जौहर ही नही बल्कि उनका पूरा परिवार देश पर कुर्बान हो गया, उनके भाई मौलाना शौकत अली भी गांधी जी के साथ भारत छोड़ो आंदोलन के अगवाकारों में थे। उनकी मां ने दोनों बेटों को मरते वक्त बुलाकर वसियत की कि बेटा देश को आजाद कराने में अगर तुम्हें अपनी जान की कुर्बानी देना पड़े तो दे देना, पीछे मत हटना। ये कहकर मां की सांस रुक गई और वो खुदा को प्यारी हो गईं। इतिहास गवाह है कि उनके दोनों बेटे मौलाना मुहम्मद अली जौहर और मौलाना शौकत अली ने अपनी जानें देकर देश को आजाद कराने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आजन खां की गलतियों की सजा विश्वविद्यालय को न दी जाए
मौलाना बरेलवी ने कहा कि आजम खां ने जो कुछ गलतियां कीं, उसकी सजा वो जेल मे भुगत रहे हैं। मगर जौहर विश्वविद्यालय एक शिक्षक संस्थान है, उसमें हजारों बच्चे पढ़ाई लिखाई का काम करते हैं, ये वो बच्चे हैं जिनमें ज्यादातर तादाद गरीब व कमजोर परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हजारों बच्चों के भविष्य की समस्या उत्पन्न हो सकती है और उनका भविष्य अंधकार में जा सकता है। इसलिए उत्तर प्रदेश हुकूमत और जिला रामपुर के प्रशासन से मेरी गुजारिश है कि आजम खां की सजा विश्वविद्यालय को न दी जाए। जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर की होने वाली कार्रवाई पर पुनः विचार करें, बल्कि विकल्पिक व्यवस्थाएं अपनाई जा सकती हैं।
प्रशासन निकाले कोई दूसरा रास्ता
मौलाना बरेलवी ने रामपुर के जिला प्रशासन और राजनीतिक लोगों से बातचीत करके एक सुझाव दिया है, कि जिन बिल्डिंगों पर बुलडोजर की कार्रवाई होनी है, उन बिल्डिंगों को हुकूमत अपने कंट्रोल मे ले ले, या फिर कंपाउंडिंग करके जुर्माना का रास्ता अपनाया जा सकता है, बिल्डिंग को ध्वस्त कर देना उचित तरीका नहीं है।