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Indore News: इंदौर में परिंदों का आशियाना महफूज, रानी सराय के सैकड़ों पेड़ों की कटाई पर जारी रहेगी रोक
Sun, 26 Jul 2026 06:51 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sun, 26 Jul 2026 06:51 AM IST
सार
अदालत ने पक्षियों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक बरकरार रखी है। मेट्रो कॉरपोरेशन को दस्तावेज पेश करने के लिए 10 अगस्त की अगली सुनवाई तक का समय दिया है, तब तक स्थिति यथावत रहेगी।
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रीगल पर विरोध करते शहरवासी
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
शहर के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक रानी सराय परिसर में परिंदों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उच्च न्यायालय के रुख के बाद परिसर में मौजूद सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक जारी रहेगी। इस फैसले से परिसर में आशियाना बनाए हजारों पक्षियों और शहर के पर्यावरण प्रेमियों को बड़ी राहत मिली है। यहां पेड़ों की कटाई रोकने के लिए दो अलग अलग जनहित याचिकाएं लगी हुई हैं।
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क्या है पूरा मामला?
रानी सराय परिसर में मेट्रो के निर्माण कार्यों की आड़ में पुराने और घने पेड़ों को काटने की योजना बनाई गई थी। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और वहां रह रहे सैकड़ों परिंदों के बेघर होने की आशंका जाहिर करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने कहा है कि एनजीटी ने पेड़ों को काटने की अनुमति दी है। इस पर कोर्ट ने उन्हें अनुमति प्रस्तुत करने के लिए अगली सुनवाई तक का समय दिया है।
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अगली सुनवाई 10 अगस्त को
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पर्यावरण संतुलन और पक्षियों के प्राकृतिक आवास के महत्व को सर्वोपरि मानते हुए पेड़ों को काटने पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल कोई भी एजेंसी इन पेड़ों पर कुल्हाड़ी नहीं चला सकेगी। पर्यावरणविदों ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक धरोहर और परिंदों के आशियाने को बचाना बेहद जरूरी है। फिलहाल, इस मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त तक स्थिति 'जैसे थी' बनी रहेगी।
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अगली सुनवाई 10 अगस्त को
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पर्यावरण संतुलन और पक्षियों के प्राकृतिक आवास के महत्व को सर्वोपरि मानते हुए पेड़ों को काटने पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल कोई भी एजेंसी इन पेड़ों पर कुल्हाड़ी नहीं चला सकेगी। पर्यावरणविदों ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक धरोहर और परिंदों के आशियाने को बचाना बेहद जरूरी है। फिलहाल, इस मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त तक स्थिति 'जैसे थी' बनी रहेगी।
