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Indore News: पांडेय दंपती की रिहाई के लिए मंत्री विजयवर्गीय ने लिखा पत्र, विरोध प्रदर्शन करने पर हुई थी जेल
Sat, 25 Jul 2026 11:06 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sat, 25 Jul 2026 11:06 PM IST
सार
Indore News: विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस दंपती से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। दंपती के दो छोटे मासूम बच्चों का हवाला देते हुए उन्होंने मानवीय आधार पर कानून के दायरे में रहकर दंपती को रिहा करने की अपील की है।
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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पांडेय दंपती।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास के बाहर प्रदर्शन करने वाले पांडेय दंपती की रिहाई के लिए स्वयं कैलाश विजयवर्गीय ने पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह को पत्र लिखा है। यद्यपि यह पत्र 24 जुलाई को प्रेषित किया गया था, परंतु यह शनिवार को सार्वजनिक हुआ है। कैलाश विजयवर्गीय ने पत्र में उल्लेख किया है कि विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधानसभा की कार्यवाही में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि उनके द्वारा दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों के संबंध में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। इसके पश्चात उमंग सिंघार और अन्य नेताओं द्वारा उक्त आरोपों का सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रचार किया गया। अगले ही दिन कैलाश विजयवर्गीय के निवेदन पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस विषय की जांच कराई गई और विधानसभा की संपूर्ण वीडियो रिकॉर्डिंग का अवलोकन किया गया। जांच के उपरांत विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में स्पष्ट रूप से बताया कि कैलाश विजयवर्गीय द्वारा ऐसा कोई भी अपमानजनक अथवा आपत्तिजनक शब्द नहीं कहा गया था, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा था। इस प्रकार उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप पूर्णतः असत्य और निराधार सिद्ध हुए।
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सोशल मीडिया पर किए गए दुष्प्रचार से लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई
कैलाश विजयवर्गीय ने पत्र में आगे लिखा कि सत्य सामने आने से पूर्व सोशल मीडिया पर किए गए दुष्प्रचार के कारण कई लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसी क्रम में इंदौर निवासी पांडेय दंपती भी इस दुष्प्रचार का शिकार होकर उनकी कॉलोनी में प्रदर्शन करने पहुंचे। चूंकि प्रदर्शन पूर्व से घोषित था, इसलिए पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिल गई थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिस व्यवस्था की गई और प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने विधि एवं नियमानुसार कार्रवाई करते हुए संबंधित दंपती को हिरासत में लेकर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने लिखा कि घटना के समय वे विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त थे। विधानसभा सत्र समाप्त होने के पश्चात उन्हें संपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त हुई। तत्पश्चात यह भी ज्ञात हुआ कि संबंधित दंपती के दो छोटे बच्चे हैं। उनका मानना है कि माता-पिता की भूल का दुष्प्रभाव उनके मासूम बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए।
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व्यक्तिगत शिकायत नहीं की
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन या संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस प्रशासन को किसी प्रकार की शिकायत नहीं दी थी और उन्हें इस संबंध में कोई व्यक्तिगत शिकायत या आपत्ति भी नहीं है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से अनुरोध किया कि यदि कानून और नियमों के अंतर्गत संभव हो तो मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पांडेय दंपती के प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर उन्हें रिहा किया जाए।
भ्रामक जानकारी का शिकार हुए दंपती
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उनका मानना है कि पांडेय दंपती सोशल मीडिया पर किए गए दुष्प्रचार का शिकार हुए थे और अब उन्हें अपनी भूल का बोध हो चुका होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में वे भ्रामक जानकारी के आधार पर ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं करेंगे।
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सोशल मीडिया पर किए गए दुष्प्रचार से लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई
कैलाश विजयवर्गीय ने पत्र में आगे लिखा कि सत्य सामने आने से पूर्व सोशल मीडिया पर किए गए दुष्प्रचार के कारण कई लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसी क्रम में इंदौर निवासी पांडेय दंपती भी इस दुष्प्रचार का शिकार होकर उनकी कॉलोनी में प्रदर्शन करने पहुंचे। चूंकि प्रदर्शन पूर्व से घोषित था, इसलिए पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिल गई थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिस व्यवस्था की गई और प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने विधि एवं नियमानुसार कार्रवाई करते हुए संबंधित दंपती को हिरासत में लेकर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने लिखा कि घटना के समय वे विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त थे। विधानसभा सत्र समाप्त होने के पश्चात उन्हें संपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त हुई। तत्पश्चात यह भी ज्ञात हुआ कि संबंधित दंपती के दो छोटे बच्चे हैं। उनका मानना है कि माता-पिता की भूल का दुष्प्रभाव उनके मासूम बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए।
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व्यक्तिगत शिकायत नहीं की
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन या संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस प्रशासन को किसी प्रकार की शिकायत नहीं दी थी और उन्हें इस संबंध में कोई व्यक्तिगत शिकायत या आपत्ति भी नहीं है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से अनुरोध किया कि यदि कानून और नियमों के अंतर्गत संभव हो तो मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पांडेय दंपती के प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर उन्हें रिहा किया जाए।
भ्रामक जानकारी का शिकार हुए दंपती
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उनका मानना है कि पांडेय दंपती सोशल मीडिया पर किए गए दुष्प्रचार का शिकार हुए थे और अब उन्हें अपनी भूल का बोध हो चुका होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में वे भ्रामक जानकारी के आधार पर ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं करेंगे।
