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Indore News: विजयवर्गीय से दूरी पर बोले मेयर-बड़ों की डांट सीख के समान, दूर-पास होने का सवाल नहीं उठता

Wed, 05 Aug 2026 07:58 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Wed, 05 Aug 2026 07:58 PM IST
सार

 मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने राजनीतिक संबंधों और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर खुलकर बात की। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री  के साथ समीकरणों पर चल रही चर्चाओं को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के कारण शहर के विकास को गति मिली है।

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Indore News: Mayor on the distance from Vijayvargiya—rebukes from elders are like lessons; the question of bei
मेयर पुष्य मित्र भार्गव - फोटो : amarujala

विस्तार

इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव की गिनती मंत्री विजयवर्गीय खेमे में होती है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अब भार्गव की निकटता मुख्यमंत्री मोहन यादव से ज्यादा बढ़ गई है। इन बातों को इसलिए भी बल मिला, क्योंकि मेयर भार्गव मंत्री विजयवर्गीय द्वारा बुलाई गई दो बैठकों में गैरमौजूद रहे थे। इस बात को लेकर मंत्री विजयवर्गीय ने मंच पर सार्वजनिक तौर पर तंज भी कसा था।

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भाजपा परिषद के चार साल पूरे होने पर मेयर भार्गव ने इस बात पर भी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैं सबको सम्मान के साथ लेकर चलने की ताकत रखता हूं। मैंने शहर के अच्छे काम मोहन जी और कैलाश जी से कराए हैं। 

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पिछले 20 साल में विजयवर्गीय ने नगर निगम के कामों में जितनी सक्रियता दिखाई, उतनी पहले कभी नहीं थी। इसका फायदा शहर को मिला। इसके अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव को जो भी प्रोजेक्ट मैंने बताए, वे उन्होंने मंजूर किए। मेयर ने यह भी कहा कि मैं राजनीति में नया हूं। वे बड़े हैं। मान लो, वे कभी कोई बात कह दें या डांट लें, तो वह हमारे लिए सीख है। दूर और पास जाने का सवाल ही नहीं उठता।
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अफसरों से मेरी पटरी नहीं बैठी

मेयर और अफसरों के बीच समन्वय की कमी की बात भी अक्सर चर्चा में रहती है। इस बात पर उन्होंने कहा कि मेरी अफसरों से कभी पटरी नहीं बैठी। पटरी मुझे बैठाना भी नहीं है, क्योंकि मुझे काम कराना है। मैं इसके लिए नहीं आया हूं। यदि वे कुछ गड़बड़ करेंगे तो मैं उन्हें रोकूंगा और डांट भी लगाऊंगा। एक निगमायुक्त ने मेरी जानकारी के बगैर दो-तीन काम किए। झगड़ा हुआ, दुर्भाग्य से भागीरथपुरा कांड हो गया और उनका तबादला हो गया। अफसर जब तक 62 साल नौकरी में हैं, काम तो उनसे ही कराना है। जो ज्यादा गड़बड़ करता है, वह खुद ही ठीक भी हो जाता है।

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