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Indore News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने दिया इस्तीफा, राहुल गांधी और जीतू पटवारी पर लगाए गंभीर आरोप

Fri, 03 Jul 2026 05:18 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Fri, 03 Jul 2026 05:18 PM IST
सार

मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राकेश सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। यादव ने संगठन के बड़े पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा देने का दावा किया है।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह के साथ राकेश सिंह यादव। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में लंबे समय से सुलग रही अंदरूनी कलह अब एक बार फिर पूरी तरह से सतह पर आ गई है। पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान ने उस समय बड़ा रूप ले लिया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने अचानक संगठन छोड़ने का ऐलान कर दिया। राकेश सिंह यादव ने न केवल पार्टी छोड़ने का दावा किया है, बल्कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश संगठन प्रभारी हरीश चौधरी की कार्यशैली पर बेहद तीखे और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति के साथ-साथ कांग्रेस के भीतर के असंतोष को भी उजागर कर दिया है।
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जीतू पटवारी पर सीधा हमला बोला
राकेश सिंह यादव ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे इस महत्वपूर्ण पद के बिल्कुल भी योग्य नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जीतू पटवारी के नेतृत्व में पार्टी का संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है और वे मनमाने ढंग से फैसले ले रहे हैं। यादव के अनुसार, संगठन में आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह खत्म हो चुका है और जो भी नेता या कार्यकर्ता असहमति की आवाज उठाता है, उसे दबाने का प्रयास किया जाता है। इसके अलावा उन्होंने प्रभारी हरीश चौधरी पर भी संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब चुनाव के दौरान टिकटों का सौदा किया था, जिसके एवज में पटवारी द्वारा उन्हें एक महंगी डिफेंडर गाड़ी दी गई थी।
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नोटिस की अंदरूनी कहानी
अपने तीन दशक से ज्यादा लंबे राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए राकेश सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने इतने वर्षों में कांग्रेस के कई बड़े और दिग्गज नेताओं के साथ मिलकर संगठन के लिए काम किया है। उन्होंने हालिया विवाद का जिक्र करते हुए बताया कि वीर भूमि न्यास मामले में जब उन्होंने पार्टी नेतृत्व से आरोपों से जुड़े पुख्ता सबूत मांगे, तो उन्हें सबूत देने के बजाय उल्टा कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। यादव ने पार्टी की रणनीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि मीडिया का बहिष्कार करने या मौन सत्याग्रह जैसे निर्देश तो दिए गए, लेकिन आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई भी ठोस दस्तावेज संगठन के सामने नहीं रखा गया।
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न्यास मामले की हकीकत
वीर भूमि न्यास से जुड़े कथित घोटाले के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए पूर्व महासचिव ने इसे पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन करार दिया। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी विभिन्न विचारधाराओं की सरकारों द्वारा अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक सरोकार से जुड़े संगठनों को रियायती दरों पर जमीनें आवंटित की जाती रही हैं। ऐसे नीतिगत फैसलों को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का रूप देना पूरी तरह गलत है। यादव ने साफ किया कि बिना पर्याप्त दस्तावेजों और ठोस प्रमाणों के इतने गंभीर आरोप लगाने के कारण खुद कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ही विवादों के घेरे में आ गया है।

केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना
राकेश सिंह यादव का गुस्सा सिर्फ प्रदेश नेतृत्व तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व और राहुल गांधी की कार्यशैली पर भी जमकर प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर गलत और चाटुकार लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है। संगठन सृजन अभियान और हाल ही में हुई संगठनात्मक नियुक्तियों में भारी अनियमितताओं का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में इस तरह का ढांचा बना रहा, तो आने वाले नगरीय निकाय चुनावों में पार्टी को इसके बेहद गंभीर और नुकसानदेह परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।


कांग्रेस ने कहा उन्हें निष्कासित किया गया
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब एक तरफ राकेश सिंह यादव खुद के द्वारा इस्तीफा दिए जाने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस संगठन ने उनके दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कांग्रेस कमेटी का आधिकारिक तौर पर कहना है कि यादव ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण संगठन से निष्कासित किया गया है और इसके लिए बाकायदा एक पत्र भी जारी किया जा चुका है। इस विरोधाभास ने अब सूबे की सियासत में इस्तीफे बनाम निष्कासन की एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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