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Twisha Sharma Case: किस आधार पर हाई कोर्ट ने त्विषा की सास गिरिबाला की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की? पांच कारण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल/जबलपुर Published by: Tarunendra Kumar Chaturvedi Updated Thu, 28 May 2026 12:04 PM IST
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सार

भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में कोर्ट की टिप्पणी और दस्तावेजों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी के अलावा शरीर पर छह एंटेमॉर्टम चोटों का जिक्र है। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोप केवल पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ भी स्पष्ट आरोप सामने आए हैं। चलिए जानते हैं वो पांच कारण कौन-कौन से थे, जिसके आधार पर हाई कोर्ट ने गिरिबाला की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की है।

Twisha Sharma Case Update Giribala Singh gets setback from MP High Court anticipatory bail application Bhopal
त्विषा शर्मा केस। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

त्विषा शर्मा की  संदिग्ध मौत का मामला पिछले कई दिनों से मीडिया की सुर्खियों में छाया हुआ है। हर दिन मामले से जुड़े नए-नए अपडेट सामने आ रहे हैं। वहीं, बीते दिन मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने त्विषा की सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने यह भी माना कि सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ भी स्पष्ट आरोप सामने आए हैं। यहां आपको विस्तार से बता रहे हैं कि वो कौन-कौन से ठोस आधार थे, जिसको देखते हुए कोर्ट ने यह फैसला लिया है।
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Twisha Sharma Case Update Giribala Singh gets setback from MP High Court anticipatory bail application Bhopal
त्विषा शर्मा का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
1. शरीर पर छह जख्म, चोट के निशान फंदे से उतारते वक्त नहीं लगे
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतका की मौत फांसी लगाने के कारण हुई। हालांकि, पोस्टमार्टम से यह भी स्पष्ट हुआ है कि मृतका के शरीर पर छह अन्य चोटों के निशान पाए गए। इनमें से चार चोटें बाएं हाथ पर, एक चोट रिंग फिंगर (अनामिका उंगली) पर और एक चोट सिर पर थी। ये सभी चोटें मृत्यु से पहले की यानी एंटेमॉर्टम थीं। क्वेरी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं।
 
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त्विषा शर्मा का मामला बना हाईप्रोफाइल। - फोटो : अमर उजाला
2. गवाहों के बयानात इशारा करते हैं कि त्विषा पर गर्भ गिराने का दबाव था
यह भी स्वीकार किया गया तथ्य है कि मृतका गर्भवती हुई थी और दो माह के भीतर उसका गर्भपात करा दिया गया। शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया है कि गर्भपात के लिए प्रतिवादी पक्ष जिम्मेदार था, जबकि प्रतिवादी पक्ष का कहना है कि मृतका स्वयं गर्भपात कराने की इच्छुक थी। रिकॉर्ड पर मौजूद रेखारानी शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, नवनिधि शर्मा, हर्षित शर्मा और राशि अबरोल के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि 13 मई को दिए गए प्रारंभिक बयानों में ही उन्होंने कहा था कि प्रतिवादी और उसका पुत्र मृतका को लगातार प्रताड़ित कर रहे थे तथा उस पर गर्भपात कराने का दबाव बना रहे थे।
 
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त्विषा और समर्थ शादी के दौरान की एक तस्वीर में। फाइल फोटो- - फोटो : अमर उजाला
3. सिर्फ बेटे नहीं, मां के खिलाफ भी आरोप
बीते 14-15 मई को आगे के बयान दर्ज किए गए और सभी बयानों में प्रतिवादी व उसके बेटे के खिलाफ स्पष्ट आरोप लगाए गए हैं। व्हाट्सएप चैट से भी यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप केवल समर्थ सिंह के खिलाफ हैं, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इन सभी तथ्यों पर विचार नहीं किया।

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एमपी हाईकोर्ट से गिरिबाला सिंह को लगा झटका। - फोटो : अमर उजाला
4. जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं आरोपी
आगे यह भी कहा गया है कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी प्रतिवादी जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं कर रही है। उसका बयान दर्ज कराने और जांच में सहयोग करने के लिए उसे कई नोटिस जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद उसने सहयोग नहीं किया।

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5. लेनदेन से यह नहीं कहा जा सकता कि दहेज की मांग नहीं हुई होगी
कोर्ट ने कहा कि जहां तक पैसों के लेन-देन का संबंध है, विवाह 09.12.2025 को संपन्न हुआ था। धनराशि का लेन-देन 09.10.2025, 16.12.2025, 14.01.2026, 25.01.2026, 12.02.2026, 26.02.2026 और 01.03.2026 को किया गया था। यह कहा गया है कि ये लेन-देन विवाह के दौरान और मृतका के विदेश जाने के समय किए गए थे।

हालांकि, यह नहीं कहा जा सकता कि मृतका की मृत्यु के निकट उसके खाते में धनराशि ट्रांसफर की गई थी। केवल इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि प्रतिवादी ने पीड़िता के खाते में अधिक धनराशि स्थानांतरित की थी, इसलिए दहेज की मांग नहीं की गई थी।

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