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Jabalpur: 34 करोड़ के धान परिवहन घोटाले पर HC सख्त, सभी जिलों में जांच के आदेश, कलेक्टरों से मांगी रिपोर्ट

Fri, 14 Aug 2026 04:22 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Fri, 14 Aug 2026 04:22 PM IST
सार

34 करोड़ रुपये के धान परिवहन घोटाले में हाईकोर्ट ने प्रदेशभर के प्रशासन को जांच के दायरे में ला दिया है। फर्जी वाहनों से धान ढोने के खुलासे के बाद अब सभी जिलों के कलेक्टरों से रिपोर्ट मांगी गई है।

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Jabalpur: 34 Crore Paddy Scam, HC Orders Statewide Probe, Seeks Reports from All District Collectors
मप्र हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में 34 करोड़ रुपये के धान परिवहन घोटाले की व्यापक स्तर पर जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने क्षेत्रों में तेजी से जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की पीठ ने की। उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन को शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने तथा आर्थिक अपराध ब्यूरो को अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

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फर्जी वाहनों से धान परिवहन का खुलासा
नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए मामला अदालत के समक्ष आया है। याचिकाकर्ता पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पीठ को बताया कि जबलपुर में जांच के दौरान धान परिवहन में भारी अनियमितताएं मिली थीं। फर्जीवाड़े के दौरान 100 से 200 क्विंटल तक धान का परिवहन करने के लिए दोपहिया और तिपहिया वाहनों के नंबर दर्ज किए गए थे। इसके अलावा कुछ मामलों में बसों जैसे वाहनों से भी धान ले जाना दर्शाया गया, जिनसे इतनी अधिक मात्रा में सामग्री ले जाना संभव ही नहीं है। जबलपुर में प्रारंभिक जांच के बाद विभिन्न आरोपियों के खिलाफ 90 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं।
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अन्य जिलों में भी व्यापक जांच की मांग
याचिका में कहा गया कि जबलपुर में सामने आई गड़बड़ी से स्पष्ट है कि यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी जैसे जिलों में भी मामले दर्ज किए गए हैं लेकिन राज्य के शेष हिस्सों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई। इससे पहले सरकार ने प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दिए थे, फिर भी जमीनी कार्रवाई सीमित ही रही। याचिकाकर्ता ने सरकार के इस रुख पर आपत्ति जताई कि केवल प्राथमिकी दर्ज कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। घोटाले का दायरा देखते हुए पूरे प्रदेश में एक साथ जांच प्रक्रिया संचालित करना बेहद आवश्यक है।


ईओडब्ल्यू और नागरिक आपूर्ति निगम से जवाब तलब
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने माना कि तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना की सक्रियता के कारण ही यह बड़ा मामला उजागर हो सका है। पीठ ने कहा कि इसी प्रकार अन्य जिलों के कलेक्टरों को भी अपने-अपने क्षेत्र में तत्परता से कार्रवाई करनी चाहिए थी। दस्तावेजों के अवलोकन के बाद पीठ ने मध्य प्रदेश के सभी जिलों में जांच की अनिवार्यता बताई।

अदालत ने आर्थिक अपराध ब्यूरो को जबलपुर धान घोटाले में जारी जांच और अब तक की प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही नागरिक आपूर्ति निगम को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि जबलपुर में हुई कार्रवाई के पश्चात राज्य स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं।

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