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Jabalpur: भोपाल पुलिस के हलफनामे पर हाईकोर्ट की नाराजगी, पूछा- 'फाइबर मसाज' का क्या मतलब है?'
Wed, 01 Jul 2026 09:56 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 09:56 AM IST
सार
जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल पुलिस के हलफनामे में "फाइबर मसाज" शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए भोपाल पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर इसका अर्थ स्पष्ट करने और पुलिस अधीक्षक को 24 घंटे के भीतर तलब किया है।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट।
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विस्तार
जबलपुर हाईकोर्ट में भोपाल पुलिस की तरफ से पेश किये गये हलफनामा में फाइबर मसाज का उपयोग किये जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह की युगलपीठ ने भोपाल पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर फाइबर मसाज मतलब समझाने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने पुलिस अधीक्षक को 24 घंटे में तलब होने के आदेष जारी किये है।
भोपाल निवासी नवाब सेंटिंगवाला की तरफ से हत्या के अपराध में सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में साल 1996 में अपील दायर की थी। हत्या के अपराध में जमानत मिलने के बाद अपील की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता अनुपस्थित रहा। युगलपीठ ने अपील की सुनवाई करते हुए पूर्व में अपीलकर्ता को पेष करने के लिए जमानती व गैर जमानती वारंट जारी किये थे। वारंट की तामील नहीं होने के कारण हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को हलफनामा व कार्यवाही रिपोर्ट पेष करने के निर्देष जारी किये थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त जहांगीराबाद की तरफ से पेष किये गये हलफनामा में अपीलकर्ता के रिश्तेदारों और उसकी संपत्ति का विवरण प्रस्तुत नही किया गया था। इसके अलावा थाना प्रभारी बजरिया पुलिस स्टेशन बजरिया भोपाल ने तरफ से जानकारी दी है कि जमानत मिलने के बाद अपीलकर्ता नवाब सेंटिंगवाला अपने भाई महफूज निवासी रुसल्ली मस्जिद के पास, वकील कॉलोनी, निशातपुरा के साथ रहने लगा था। हलफनामा में नवाब सेंटिंगवाला के पिता का नाम सैयद साजिद अली और उसके भाई के पिता का नाम मो. इकराम, महफूज बताया गया है।
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ये भी पढ़ें- Live Dausa Bus Fire Live: ऋषिकेश से इंदौर जा रही बस ट्रक से टकराकर धधकी, आठ की मौत; घायलों का इलाज जारी
युगलपीठ ने अपने आदेष में कहा है कि पिता के नामों में अंतर है। ऐसा लगता है कि रिपोर्ट बिना ध्यान दिए तैयार की गई है और पुलिस अधिकारियों ने कोई गंभीर कोशिश नहीं की है। इसके अलावा फाइबर मसाज शब्द का उपयोग किया गया है। पुलिस आयुक्त हलफनामा व फाइबर मसाज का मतलब व्यक्तिगत उपस्थित होकर समझाये। युगलपीठ ने अपील पर अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की है।
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भोपाल निवासी नवाब सेंटिंगवाला की तरफ से हत्या के अपराध में सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में साल 1996 में अपील दायर की थी। हत्या के अपराध में जमानत मिलने के बाद अपील की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता अनुपस्थित रहा। युगलपीठ ने अपील की सुनवाई करते हुए पूर्व में अपीलकर्ता को पेष करने के लिए जमानती व गैर जमानती वारंट जारी किये थे। वारंट की तामील नहीं होने के कारण हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को हलफनामा व कार्यवाही रिपोर्ट पेष करने के निर्देष जारी किये थे।
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याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त जहांगीराबाद की तरफ से पेष किये गये हलफनामा में अपीलकर्ता के रिश्तेदारों और उसकी संपत्ति का विवरण प्रस्तुत नही किया गया था। इसके अलावा थाना प्रभारी बजरिया पुलिस स्टेशन बजरिया भोपाल ने तरफ से जानकारी दी है कि जमानत मिलने के बाद अपीलकर्ता नवाब सेंटिंगवाला अपने भाई महफूज निवासी रुसल्ली मस्जिद के पास, वकील कॉलोनी, निशातपुरा के साथ रहने लगा था। हलफनामा में नवाब सेंटिंगवाला के पिता का नाम सैयद साजिद अली और उसके भाई के पिता का नाम मो. इकराम, महफूज बताया गया है।
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युगलपीठ ने अपने आदेष में कहा है कि पिता के नामों में अंतर है। ऐसा लगता है कि रिपोर्ट बिना ध्यान दिए तैयार की गई है और पुलिस अधिकारियों ने कोई गंभीर कोशिश नहीं की है। इसके अलावा फाइबर मसाज शब्द का उपयोग किया गया है। पुलिस आयुक्त हलफनामा व फाइबर मसाज का मतलब व्यक्तिगत उपस्थित होकर समझाये। युगलपीठ ने अपील पर अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की है।
