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OBC Reservation: कुल आरक्षण की 50 फीसदी सीमा पर केंद्रित रही बहस, कल भी विशेष बेंच के समक्ष जारी रहेगी सुनवाई
Wed, 15 Jul 2026 11:00 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2026 11:00 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में मेरिट पर नियमित सुनवाई शुरू की। याचिकाकर्ताओं ने 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा के उल्लंघन का तर्क दिया। सुनवाई अधूरी रहने पर अगली तारीख गुरुवार तय की गई। इस फैसले पर लाखों अभ्यर्थियों और राज्य सरकार की नजरें टिकी हैं।
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने बुधवार से बहुचर्चित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में मेरिट पर नियमित सुनवाई शुरू कर दी। प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की विशेष पीठ के समक्ष पहले दिन आरक्षण बढ़ाने के निर्णय को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने विस्तार से पक्ष रखा। हालांकि समयाभाव के कारण उनकी बहस पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार दोपहर 2:30 बजे तय की है।
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यह मामला वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के निर्णय से जुड़ा है। इस फैसले को चुनौती देते हुए कुल 91 याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट से मामला वापस आने के बाद हाईकोर्ट की विशेष पीठ इसकी नियमित सुनवाई कर रही है।
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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने संविधान के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने से प्रदेश में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से अधिक हो जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय सीमा का पालन करना अनिवार्य है और राज्य सरकार का निर्णय इसी सिद्धांत के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर संविधान और न्यायालयों द्वारा स्थापित सिद्धांतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत दलीलों पर विस्तृत सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। इसके बाद राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों की ओर से भी अपना पक्ष रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि यह विवाद पिछले सात वर्षों से न्यायिक विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट से वापस आने के बाद हाईकोर्ट की विशेष पीठ इस मामले की नियमित सुनवाई कर रही है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेशों के कारण प्रदेश की अनेक सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ फिलहाल लागू नहीं हो सका है। इसलिए इस मामले के अंतिम निर्णय पर लाखों अभ्यर्थियों और राज्य सरकार, दोनों की निगाहें टिकी हैं।
