टाइगर स्टेट पर दाग: एक माह में 10 बाघों की मौत, हाईकोर्ट ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर से मांगा जवाब
मध्य प्रदेश में 2025 में 54 बाघों की मौत पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई। 2026 में भी 10 बाघों की मौत हो चुकी है, अधिकांश अप्राकृतिक कारणों से। कोर्ट ने बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर से रिपोर्ट मांगी और केंद्र को दो सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए।
विस्तार
देश में टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त मध्य प्रदेश में बीते वर्ष 2025 में 54 बाघों की मौत के मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि टाइगर प्रोजेक्ट प्रारंभ होने के बाद एक साल में सबसे अधिक बाघों की मौत हुई है। याचिका पर बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ को बताया गया कि चालू साल 2026 में भी अब तक प्रदेश में 10 टाइगर की मौत हो चुकी है। शडडोल जिले तथा उसके अंतर्गत आने वाले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 6 टाइगर की मौत हुई है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को टाइगरों की मौत के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए हैं।
भोपाल निवासी वन्य जीव कार्यकर्ता अजय दुबे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि दुनिया में बाघों की कुल आबादी 5,421 है। इसमें से भारत में 3167 बाघ हैं और देश में टाइगर की आबादी दो-तिहाई। नवीनतम गणना के मुताबिक मध्य प्रदेश में 785 टाइगर हैं, जो देश के कुल बाघ की 25 प्रतिशत है।
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टाइगर स्टेट होने के बावजूद साल 2025 में मध्य प्रदेश में 54 टाइगर की मौत हुई है। प्रदेश में साल 2022 में 43 बाघों की मौतें, साल 2023 में 45 मौतें, साल 2024 में 46 मौतें हुई थीं। देश में टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 1973 में हुई थी। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद प्रदेश में सबसे अधिक टाइगरों की मौत पिछले साल 2025 में हुई है। सरकार बाघों की संख्या में बढ़ोतरी की तारीफ कर रही है, लेकिन जंगलों में बाघ रहस्यमयी और अक्सर संदिग्ध हालात में मर रहे हैं।
अप्राकृतिक कारणों से हो रही मौतें
याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी की तरफ से बताया गया कि इस साल अभी तक 10 टाइगर की मौत हो गई है। किसी भी बाघ की प्राकृतिक मौत नहीं हुई है। सभी बाघों की मौत करंट लगने या आप्राकृतिक कारणों से हुई है।
केंद्र ने मांगा जवाब का वक्त
केंद्र सरकार की तरफ से जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद जवाब पेश करने के लिए केंद्र सरकार को दो सप्ताह का समय प्रदान करते हुए उक्त आदेश जारी किए।

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