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तेरे जैसे हजार कर लूंगी: पत्नी ने उकसाया तो पति ने सिर पर पत्थर मारकर की हत्या, अब हाईकोर्ट ने कम कर दी सजा

Fri, 03 Jul 2026 05:35 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 03 Jul 2026 05:35 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा में पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी शिवा कहार की उम्रकैद घटाकर सात वर्ष का कठोर कारावास कर दिया। कोर्ट ने माना कि घटना पत्नी के कथित अपमानजनक शब्दों से अचानक हुए उकसावे में हुई थी। आरोपी ने घटना के बाद स्वयं पुलिस और परिजनों को सूचना दी थी।

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Provoked by wife, husband kills her by hitting her on head with stone; now High Court has reduced the sentence
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी की उम्रकैद की सजा को घटाकर सात वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने माना कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि पत्नी के कथित अपमानजनक शब्दों से उत्पन्न अचानक और गंभीर उकसावे के कारण हुई थी। ऐसे में यह मामला हत्या की बजाय गैर-इरादतन मानव वध की श्रेणी में आता है।

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अभियोजन के अनुसार, 18 सितंबर 2021 को छिंदवाड़ा जिले के चौरई ब्लॉक निवासी शिवा कहार ने अपनी पत्नी किरण की हत्या कर दी थी। घटना के समय किरण सात माह की गर्भवती थी। दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान किरण ने कथित तौर पर कहा था, "तेरे जैसे हजार पति कर लूंगी।" आरोपी के अनुसार, यह बात सुनकर वह अचानक अपना आपा खो बैठा और पास में पड़ा पत्थर उठाकर पत्नी के सिर पर मार दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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छिंदवाड़ा अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
घटना के बाद आरोपी फरार नहीं हुआ। उसने स्वयं अपने ससुर और संबंधित पुलिस थाने को फोन कर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले की सुनवाई के बाद छिंदवाड़ा जिला न्यायालय ने शिवा कहार को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-1) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने बदला फैसला
अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी का हत्या करने का पूर्वनियोजित इरादा नहीं था। घटना अचानक हुए विवाद और गंभीर उकसावे का परिणाम थी। साथ ही, घटना के बाद आरोपी का स्वयं पुलिस और परिजनों को सूचना देना भी इस बात का संकेत है कि वह अपराध छिपाने या फरार होने की मंशा नहीं रखता था। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा में संशोधन करते हुए उम्रकैद को घटाकर सात वर्ष के कठोर कारावास में परिवर्तित कर दिया।

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