MP News: दो नाबालिगों की तलाश में साढ़े पांच हजार KM तक छानी खाक, झाबुआ पुलिस असम पहुंची; 20 दिन में ढूंढ लाए
पिटोल पुलिस ने दो नाबालिग बालिकाओं को बहला-फुसलाकर असम ले जाने के मामले में करीब 6 हजार किलोमीटर का सफर तय कर दोनों को सुरक्षित बरामद किया। साइबर सेल की मदद से लोकेशन ट्रेस की गई। सात राज्यों से होते हुए पुलिस असम पहुंची और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
पिटोल पुलिस ने दो नाबालिग बालिकाओं को बहला-फुसलाकर असम ले जाने के मामले में करीब 6 हजार किलोमीटर का सफर तय कर दोनों को सुरक्षित बरामद किया। साइबर सेल की मदद से लोकेशन ट्रेस की गई। सात राज्यों से होते हुए पुलिस असम पहुंची और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
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दो नाबालिग बालिकाओं की तलाश में पिटोल पुलिस ने करीब 6 हजार किलोमीटर का सफर तय कर असम तक पहुंच बनाई और आखिरकार दोनों को सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचा दिया। तकनीकी जांच, साइबर सेल की मदद और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में पुलिस ने कई राज्यों की सीमाएं पार करते हुए इस कार्रवाई को अंजाम दिया। अपराध दर्ज होने से लेकर बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी, उन्हें परिजनों के सुपुर्द करने और आरोपियों को जेल भेजने तक की पूरी कार्रवाई करीब 20 दिनों में पूरी की गई।
पुलिस के अनुसार पिटोल क्षेत्र में रेलवे लाइन निर्माण का कार्य चल रहा है। इसी कार्य में असम निवासी दो सगे भाई सुदीप और प्रदीप भी मजदूरी कर रहे थे। इसी दौरान दोनों की क्षेत्र की दो नाबालिग बालिकाओं से पहचान हुई। आरोप है कि दोनों भाइयों ने बालिकाओं को बहला-फुसलाया और उन्हें असम स्थित अपने गांव ले गए। बालिकाओं के लापता होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू की। मामला नाबालिग बालिकाओं से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने जांच को प्राथमिकता दी। साइबर सेल की मदद से मोबाइल और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण किया गया। लगातार तकनीकी निगरानी और प्रयासों के बाद पुलिस को आरोपियों की संभावित लोकेशन असम में होने की जानकारी मिली।
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सात राज्यों से होकर असम पहुंची पुलिस टीम
लोकेशन की पुष्टि होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम को असम रवाना किया गया। टीम ने मध्य प्रदेश से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मेघालय होते हुए असम तक का सफर तय किया। आरोपियों का गांव बांग्लादेश सीमा के समीप के क्षेत्र में बताया गया है। पुलिस दल में एएसआई नरेंद्र परमार, प्रधान आरक्षक दिलीप डावर, आरक्षक संजू बघेल और महिला आरक्षक नेहा मेड़ा शामिल थे। बालिकाओं के परिजन भी पुलिस टीम के साथ असम पहुंचे। असम पहुंचने के बाद पिटोल पुलिस ने स्थानीय पुलिस से समन्वय स्थापित किया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद दोनों नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित बरामद कर लिया गया और दोनों आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में लिया गया।
10 दिन सफर और कानूनी प्रक्रिया में लगे
पुलिस के अनुसार इस पूरे अभियान में आने-जाने सहित करीब 6 हजार किलोमीटर की दूरी तय की गई। लगभग 10 दिन का समय सफर और असम में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में लगा। इसके अलावा तकनीकी जांच, लोकेशन की पुष्टि, स्थानीय पुलिस से संपर्क और कार्रवाई की रणनीति तैयार करने में भी समय लगा।
मध्यप्रदेश लौटने के बाद पुलिस ने आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर दोनों बालिकाओं को सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। वहीं दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
“बालिकाओं की सुरक्षित वापसी पहली प्राथमिकता थी”
चौकी प्रभारी अशोक बघेल ने बताया कि, करीब 6 हजार किलोमीटर की आवाजाही और कई राज्यों से होकर की गई इस कार्रवाई में झाबुआ पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन, साइबर सेल की तकनीकी सहायता तथा असम की स्थानीय पुलिस का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। हमारी पहली प्राथमिकता दोनों नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित बरामद कर वापस लाना और पूरे मामले में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करना थी।
