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MP: केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन उग्र, यहां ‘मिट्टी सत्याग्रह’ में उतरे हजारों आदिवासी; कितना होगा असर?
Tue, 14 Apr 2026 08:12 AM IST
छतरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
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Published by: छतरपुर ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 08:12 AM IST
सार
शरीर में मिट्टी लगाए हुए हजारों पुरुष और महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में विस्थापितों का गुस्सा सातमे आसमान पर है। सरकार से अपने हक की मांग कर रहे हैं। बीते दिन हजारों आदिवासी, महिलाएं और बच्चे केन नदी में उतर गए। ‘मिट्टी सत्याग्रह’ शुरू कर दिया। देखें कैसा था मंजर?
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केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध करता आदिवासी समाज।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में विस्थापितों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन के 9वें दिन और सामूहिक भूख हड़ताल के 48 घंटे पूरे होते ही प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। सोमवार सुबह हजारों आदिवासी, महिलाएं और बच्चे केन नदी में उतर गए और शरीर पर गीली मिट्टी लपेटकर ‘मिट्टी सत्याग्रह’ शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने ‘जल, जंगल, जमीन’ के नारे लगाते हुए साफ संदेश दिया कि वे इस भूमि के मूल निवासी हैं और बिना उचित मुआवजा व पुनर्वास के हटना स्वीकार नहीं करेंगे। कई बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा कि अगर उन्हें जबरन बेदखल किया गया, तो वे इसी मिट्टी में दफन होना पसंद करेंगे।
धूप में ‘आकाश सत्याग्रह’, बिगड़ रही हालत..
भीषण गर्मी और खुले आसमान के नीचे ‘आकाश सत्याग्रह’ भी जारी है। हजारों लोग जमीन पर लेटकर बिना अन्न ग्रहण किए विरोध कर रहे हैं। भूख हड़ताल के चलते कई महिलाओं की हालत बिगड़ने लगी है। मौके पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से चिंता और बढ़ गई है।
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ये भी पढ़ें- MP Board Result 2026: 16 लाख छात्रों का इंतजार खत्म, 15 अप्रैल को जारी होगा 10वीं-12वीं का रिजल्ट
प्रशासन पर चुप्पी का आरोप..
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 48 घंटों से लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले हैं, लेकिन प्रशासन अब तक कोई ठोस पहल नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि नियमों और कानूनों (धारा 11, 15, 18) की अनदेखी कर विस्थापितों को जबरन हटाने की कोशिश की जा रही है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी..
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचकर समाधान नहीं करता, तो आंदोलन और उग्र होगा। फिलहाल केन नदी किनारे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। आगे देखना होगा कि इस विरोध का कितना असर सरकार पर पड़ता है।
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प्रदर्शनकारियों ने ‘जल, जंगल, जमीन’ के नारे लगाते हुए साफ संदेश दिया कि वे इस भूमि के मूल निवासी हैं और बिना उचित मुआवजा व पुनर्वास के हटना स्वीकार नहीं करेंगे। कई बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा कि अगर उन्हें जबरन बेदखल किया गया, तो वे इसी मिट्टी में दफन होना पसंद करेंगे।
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धूप में ‘आकाश सत्याग्रह’, बिगड़ रही हालत..
भीषण गर्मी और खुले आसमान के नीचे ‘आकाश सत्याग्रह’ भी जारी है। हजारों लोग जमीन पर लेटकर बिना अन्न ग्रहण किए विरोध कर रहे हैं। भूख हड़ताल के चलते कई महिलाओं की हालत बिगड़ने लगी है। मौके पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से चिंता और बढ़ गई है।
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प्रशासन पर चुप्पी का आरोप..
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 48 घंटों से लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले हैं, लेकिन प्रशासन अब तक कोई ठोस पहल नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि नियमों और कानूनों (धारा 11, 15, 18) की अनदेखी कर विस्थापितों को जबरन हटाने की कोशिश की जा रही है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी..
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचकर समाधान नहीं करता, तो आंदोलन और उग्र होगा। फिलहाल केन नदी किनारे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। आगे देखना होगा कि इस विरोध का कितना असर सरकार पर पड़ता है।
