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Maheshwar News: भूमि अधिग्रहण को लेकर बैठक बेनतीजा, किसानों की चेतावनी- मुआवजा बढ़ाए बिना नहीं होने देंगे काम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर
Published by: खरगोन ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2026 06:52 PM IST
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सार
महेश्वर-बड़वाह-धामनोद राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ गया है। एसडीएम के साथ हुई बैठक बेनतीजा रही।
भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान और अफसर आमने-सामने
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महेश्वर-बड़वाह-धामनोद नवीन राजमार्ग क्रमांक 36 के निर्माण के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रभावित किसानों और एसडीएम के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक बिना किसी ठोस निष्कर्ष के समाप्त हो गई। किसानों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उनकी शर्तें नहीं मानी जातीं, वे जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं करने देंगे।
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बैठक के लिए सैकड़ों किसानों के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचे। भारतीय किसान संघ के संभाग अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह राठौर ने किसानों की ओर से अपनी बात रखते हुए एसडीएम पूर्वा मंडलोई से कहा कि हमें विकास से आपत्ति नहीं है लेकिन किसानों की बर्बादी की कीमत पर विकास नहीं होना चाहिए। वर्ष 2008 से 2026 तक कई क्षेत्रों में रजिस्ट्री की गाइड लाइन दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यदि कहीं बढ़ोतरी हुई भी है, तो वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
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किसानों का कहना है कि आज के बाजार मूल्य और सरकारी गाइड लाइन में जमीन-आसमान का अंतर है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। 2008 की दरों पर 2026 में जमीन अधिग्रहण कर मुआवजा देना सरासर अन्याय है।
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बैठक में तहसीलदार कैलाश सस्तिया, सब रजिस्ट्रार गरिमा चौहान, नायब तहसीलदार संजय बावेल की उपस्थिति में किसानों के कड़े विरोध के चलते सम्मति नहीं बन पाई। किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान दरों पर वे अपनी उपजाऊ जमीन देने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा- पहले यह निर्धारित कर हमें बताया जाए कि हमारी जमीन का अधिग्रहण किस दर पर किया जाएगा, उसके बाद ही हम प्रशासन को किसी भी तरह का सहयोग करेंगे अन्यथा जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं करनें देंगे।
एसडीएम पूर्वा मंडलोई बार-बार किसानों को समझाती रहीं कि वर्तमान में बेसिक सीमांकन किया जा रहा है। इससे किसानों का ही फायदा है। सीमांकन से यह पता चल सकेगा कि वास्तविक रूप से किस किसान की कितनी भूमि का अधिग्रहण होना है। भविष्य में जब सड़क बन जाएगी तब यह सीमांकन किसानों के ही काम आएगा। बावजूद इसके किसान अपनी बात पर अड़े रहे।
प्रभावित किसानों की मांग है कि भूमि अधिग्रहण के लिए वर्तमान गाइड लाइन दरों में 300 से 400 प्रतिशत की वृद्धि की जाए। नान्द्रा, कुंभ्या, बोथ्यापुर और पथराड़ जैसे गांवों की गाइड लाइन दरें बहुत कम हैं। इन्हें पड़ोसी गांव धरगांव और कतरगांव के समकक्ष लाया जाए।
धारा 11 प्रकाशन से पहले जिन जमीनों का डायवर्जन हो चुका है, उन्हें डायवर्टेड मानकर ही मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा प्रस्तावित सड़क की ऊंचाई जमीन स्तर पर ही रखी जाए और सड़क के दोनों ओर दीवार या बैरिकेडिंग न की जाए ताकि किसानों का आवागमन बाधित न हो। प्रशासन और किसानों के बीच जो भी समझौता हो, उसे कलेक्टर द्वारा लिखित रूप में स्वीकार किए जाने जैसी मांगें शामिल हैं।

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