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MP: 'महिलाएं 2000 वर्षों से पैरों की जूती', बरैया के बयान से सदन में हंगामा, CM बोले- आप कहना क्या चाहते हैं?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sabahat Husain Updated Mon, 27 Apr 2026 05:42 PM IST
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सार

MP Assembly Special Session: मध्य प्रदेश विधानसभा में महिला आरक्षण पर बहस के दौरान कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के बयान पर सदन में बवाल मच गया। खुद सीएम मोहन यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। क्या कुछ कहा, आइए जानते हैं। 

MP Assembly Uproar Row Erupts Over Baraiya’s  Remark, CM Seeks Clarification
विधायक फूल सिंह बरैया और सीएम मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान तीखी बहस छिड़ गई। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के “महिलाएं 2000 वर्षों से पैरों की जूती बनी रही हैं” वाले बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।

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मंत्री कृष्णा गौर ने इस बयान को महिलाओं का अपमान बताते हुए बरैया से माफी की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने भी उन्हें विषय पर रहने की हिदायत दी। मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि एक ओर महिला आरक्षण पर गंभीर चर्चा हो रही है, वहीं कांग्रेस महिलाओं को अपमानजनक तरीके से पेश कर रही है। विवाद बढ़ने पर बरैया ने सफाई दी कि उनका बयान महिलाओं की स्थिति पर सवाल उठाने के लिए था, न कि उनका अपमान करने के लिए।

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क्या था बरैया का पूरा बयान?
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने विधानसभा में भाजपा पर महिलाओं को आरक्षण देने की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाज में महिला और पुरुष गाड़ी के दो पहिए हैं, लेकिन एक पहिया अब भी पिछड़ा हुआ है, जिस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। बरैया ने कहा कि महिलाएं सदियों से सामाजिक रूप से दबाई जाती रही हैं और इस मानसिकता को बदलना जरूरी है। बरैया ने आगे कहा कि महिला पिछले 2000 वर्षों से पैरों की जूती बनी आ रही हैं, कांग्रेस तो अभी 150 साल पुरानी है।


क्या बोले सीएम यादव?
इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बरैया को सीधे तौर पर घेरते हुए कहा कि आपकी बातों का संदर्भ स्पष्ट नहीं है, कभी देवदासी प्रथा, कभी हजारों साल पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हैं, आखिर आप कहना क्या चाहते हैं, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन में इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है, इसलिए मुद्दे से भटकने के बजाय सार्थक और केंद्रित बहस होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देश में महिलाओं के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष होता रहा है। राजा राममोहन राय, ज्योतिराव फुले और स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्वों ने इस दिशा में काम किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को नई दिशा देने का काम किया गया है।

पढ़ें:  महिला आरक्षण पर घमासान, कांग्रेस ने तत्काल 33% आरक्षण की उठाई मांग, भाजपा ने रखा ‘नारी शक्ति वंदन’ संकल्प

नेता प्रतिपक्ष सिंघार और भाजपा विधायक हेमंत खंडेलवाल भी भिड़े

क्या बोले खंडेलवाल?
विधानसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान विधायक व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि यह केवल एक विषय नहीं, बल्कि देश की दिशा तय करने वाला मुद्दा है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति पुरुषों के बराबर अधिकारों की हकदार है और सदन को रानी लक्ष्मीबाई व अहिल्याबाई होलकर के सुशासन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में महिलाओं की स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है और भारत भी उन देशों में शामिल हो सकता है, जहां 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। खंडेलवाल ने जोर देते हुए कहा कि जब तक आधी आबादी को पूरा न्याय नहीं मिलेगा, तब तक महिला विकास की परिकल्पना साकार नहीं हो सकती।

क्या बोले सिंघार?
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल द्वारा महिलाओं को तत्काल प्रभाव से वर्तमान सीटों पर 33% आरक्षण देने के लिए लाए गए अशासकीय संकल्प को सरकार द्वारा स्वीकार न करना यह स्पष्ट करता है कि भाजपा की मंशा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक दिखावा है। महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से उठाते रहेंगे। सिंघार ने कहा कि भाजपा के प्रस्ताव में साफ है कि आरक्षण 2028-29 के बाद, परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। उनका कहना था कि यह महिलाओं को तत्काल लाभ देने की मंशा नहीं दिखाता। उन्होंने बताया कि विपक्ष की मांग है कि वर्तमान सीटों के आधार पर ही विधानसभा और लोकसभा में तुरंत महिला आरक्षण लागू किया जाए।

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